
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को “एकतरफा” बताते हुए तीखा हमला बोला है। ट्रम्प ने दावा किया कि भारत ने लंबे समय तक अमेरिकी सामानों पर 100% तक का आयात शुल्क लगाया, जबकि अमेरिका ने भारत पर शुल्क नहीं लगाया। उनके अनुसार इस असंतुलन का ही नतीजा था कि भारत अमेरिकी बाज़ार का लाभ उठाता रहा।
व्यापारिक रिश्तों पर आरोप
ट्रम्प ने सोमवार को दिए बयान में कहा, “हम भारत के साथ अच्छे संबंध रखते हैं, लेकिन यह रिश्ता लंबे समय तक एकतरफा रहा। वे हमसे व्यापार कर रहे थे क्योंकि हमने कोई शुल्क नहीं वसूला, जबकि उन्होंने हमारे उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाया।” राष्ट्रपति ने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिकी मोटरसाइकिल कंपनी हार्ले-डेविडसन पर भारत ने 200% टैरिफ लगाया था, जिसकी वजह से कंपनी को भारत में अपना संयंत्र स्थापित करना पड़ा।
अमेरिकी टैरिफ नीति का बचाव
ट्रम्प ने हाल ही में भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाने के फैसले का बचाव भी किया। उनका कहना था कि यह कदम अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि अब चीन, मैक्सिको और कनाडा जैसे देशों की कई कंपनियां अमेरिका में आकर उत्पादन कर रही हैं ताकि टैरिफ से बच सकें। ट्रम्प के मुताबिक यह अमेरिका के लिए सकारात्मक बदलाव है क्योंकि इससे घरेलू निर्माण और रोज़गार को बल मिलेगा।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने ट्रम्प के बयानों और टैरिफ फैसलों पर कड़ी आपत्ति जताई है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका का यह रवैया अनुचित है और इससे व्यापारिक संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि भारत समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर व्यापार करना चाहता है, लेकिन दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत अपनी आर्थिक नीतियों को राष्ट्रीय हित के अनुसार ही आगे बढ़ाएगा।
विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की आक्रामक टैरिफ नीति से भारत-अमेरिका के सामरिक और आर्थिक संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिका चाहता है कि भारत ऊर्जा, रक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बड़े आयात खोले, जबकि भारत अपने कृषि और लघु उद्योगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। जानकारों का कहना है कि अगर तनाव बढ़ा तो भारत रूस और चीन जैसे देशों के साथ अधिक नज़दीकी बढ़ा सकता है, जिससे ‘क्वाड’ जैसे रणनीतिक गठबंधनों की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ेगा।
भविष्य की चुनौती
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की संभावना पर चर्चा चल रही है। लेकिन ट्रम्प के हालिया बयानों ने इस समझौते की राह मुश्किल कर दी है। दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 190 अरब डॉलर से अधिक है और भारत अमेरिका का अहम साझेदार माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों देश तनाव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाते हैं तो न केवल व्यापारिक रिश्ते सुधरेंगे बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
ट्रम्प का यह बयान दोनों देशों के बीच मौजूदा आर्थिक तनाव को और गहराता है। अब सबकी नज़रें इस बात पर होंगी कि आने वाले महीनों में भारत और अमेरिका इस विवाद को बातचीत से सुलझा पाते हैं या यह टकराव आगे बढ़कर बड़े रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित करता है।
Author: THE CG NEWS
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