
शनिवार को देशभर में गणेश चतुर्थी के समापन अवसर पर गणेश विसर्जन बड़े ही धूमधाम और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ। जगह-जगह भगवान गणेश की झांकियों, शोभायात्राओं और भजन-कीर्तन के साथ भक्त बप्पा को विदाई देते दिखाई दिए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, जयकारों की आवाज़ और रंग-बिरंगे गुलाल से सड़कों पर उत्सव का रंग बिखर गया। श्रद्धालु पूरे उत्साह और उमंग के साथ अपने आराध्य को विदाई देते हुए अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना करते दिखे।
मुंबई और महाराष्ट्र में अद्भुत नज़ारा
गणेशोत्सव की भव्यता का सबसे बड़ा नज़ारा महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और पुणे में देखने को मिला। मुंबई की लालबागचा राजा और अंधेरी, गिरगांव चौपाटी जैसे समुद्र तटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु गणपति बप्पा की शोभायात्रा में शामिल हुए। ढोल ताशा पथक की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पुणे और नागपुर जैसे शहरों में भी विशाल झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच गणेश विसर्जन का आयोजन हुआ।
उत्तर भारत में भी दिखा उत्साह
दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे शहरों में भी गणेश विसर्जन का आयोजन श्रद्धा और आस्था के साथ हुआ। गंगा और यमुना घाटों पर हजारों लोग गणपति की मूर्तियों के साथ पहुंचे और मंत्रोच्चार के बीच विसर्जन किया। इस दौरान सुरक्षा बलों और स्वयंसेवी संगठनों ने व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक उत्साह से भरे दिखाई दिए और शोभायात्राओं में सांस्कृतिक नृत्य और गीतों ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया।
दक्षिण भारत में पारंपरिक रंग
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी गणेश विसर्जन का उत्सव पारंपरिक रंगों से सराबोर रहा। बेंगलुरु और हैदराबाद की सड़कों पर सुबह से ही भक्तों का जनसैलाब उमड़ा। विशेष रूप से तेलंगाना के खैरताबाद गणेश का विसर्जन देखने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे। नृत्य, संगीत और लोककलाओं के साथ शोभायात्राएं निकलती रहीं और देर रात तक उत्सव का माहौल बना रहा।
पर्यावरण का भी रखा गया ध्यान
देशभर में इस बार गणेश विसर्जन के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। कई जगहों पर कृत्रिम तालाब बनाए गए जहां मिट्टी की मूर्तियों का विसर्जन किया गया। प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपील की थी कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का उपयोग न करें और नदियों को प्रदूषित होने से बचाएं। बड़ी संख्या में लोगों ने इस पहल का समर्थन किया और इको-फ्रेंडली गणपति विसर्जन को प्राथमिकता दी।
निष्कर्ष
गणेश विसर्जन के साथ ही दस दिनों तक चले गणेशोत्सव का समापन हो गया। श्रद्धालुओं ने आस्था और उल्लास के बीच बप्पा को विदाई दी और अगले वर्ष पुनः जल्दी आने की कामना की। देशभर में फैले इस उत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश दिया। गणपति बप्पा के जयकारों के बीच जब मूर्तियाँ जल में समाई, तो लोगों की आंखों में भावुकता और दिलों में उम्मीदें साफ झलक रही थीं—“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।”
Author: THE CG NEWS
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