सी.पी. राधाकृष्णन : देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने, नाम की वजह से दो बार छूटा केंद्रीय मंत्री बनने का मौका

SHARE:

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदेशन रेड्डी को बड़े अंतर से हराया। कुल 767 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें से 752 वोट वैध घोषित हुए। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले जबकि रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए। इस जीत ने न केवल NDA की ताकत को उजागर किया बल्कि विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए।

भारी अंतर से मिली जीत और विपक्ष की कमजोरी

राधाकृष्णन की जीत अपेक्षा से कहीं अधिक रही। संसद में भाजपा और सहयोगी दलों का पहले से ही बहुमत था, लेकिन विपक्ष को उम्मीद थी कि वह कम से कम मजबूती से मुकाबला करेगा। नतीजों ने यह संकेत दिया कि विपक्षी दलों के बीच एकजुटता की कमी रही और क्रॉस वोटिंग भी हुई। इसी वजह से बी. सुदेशन रेड्डी को अपेक्षा से कम समर्थन मिला और परिणाम NDA के पक्ष में स्पष्ट रूप से झुक गया।

राधाकृष्णन का लंबा राजनीतिक सफर

67 वर्षीय सी.पी. राधाकृष्णन आरएसएस और भाजपा के अनुभवी नेता रहे हैं। वे 1998 और 1999 में कोयम्बटूर से सांसद चुने गए थे। महाराष्ट्र और झारखंड के राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं। उन्हें राजनीति में ‘सौम्य नेता’ के रूप में पहचाना जाता है, जिनके विपक्षी दलों के नेताओं से भी अच्छे संबंध रहे हैं। इस बार उपराष्ट्रपति पद पर उनकी जीत भाजपा के दक्षिण भारत में राजनीतिक विस्तार के लिए भी अहम मानी जा रही है।

नाम की वजह से छूट गए मंत्री पद

राजनीतिक जीवन के दौरान उनके साथ एक रोचक घटना भी जुड़ी है। वाजपेयी सरकार (2000) और मोदी सरकार (2014) में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की संभावना थी, लेकिन नाम की समानता के कारण यह मौका उनसे छूट गया। उस समय “पों राधाकृष्णन” नाम के एक अन्य नेता को मंत्री बना दिया गया और सी.पी. राधाकृष्णन दोनों बार कैबिनेट से बाहर रह गए। अब उपराष्ट्रपति बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव हासिल किया है।

विपक्ष का उम्मीदवार और चुनाव की पृष्ठभूमि

विपक्षी INDIA गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदेशन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में भी कार्य किया है। हालांकि उन्हें 300 वोट मिले, लेकिन विपक्षी दलों की रणनीति और आंतरिक मतभेदों ने उनके जीतने की संभावना को कमजोर कर दिया।

राधाकृष्णन का पहला बयान

चुनाव परिणाम आने के बाद सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे “राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि वे राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत करने और केंद्र व राज्यों के बीच सामंजस्य बढ़ाने की बात कही।

उपराष्ट्रपति पद का महत्व

संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सबसे बड़ा पद है। वे राज्यसभा के सभापति भी होते हैं और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनकी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं। यह पद औपचारिक होते हुए भी संवैधानिक संतुलन और राजनीतिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

सी.पी. राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद तक पहुँचना NDA की रणनीति और उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता का परिणाम है। दो बार मंत्री पद से वंचित होने के बाद यह जीत उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि साबित हुई है। उनकी जीत ने न केवल भाजपा को नई मजबूती दी है बल्कि दक्षिण भारत में उसकी सियासी पकड़ को भी और मजबूत किया है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

TheCGNews.in – छत्तीसगढ़ की सच्ची आवाज़ “TheCGNews.in” छत्तीसगढ़ का एक उभरता हुआ डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जो प्रदेश की ज़मीन से जुड़ी, वास्तविक और निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुँचाने के मिशन के साथ कार्यरत है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी ताकत है – स्थानीयता और विश्वसनीयता। TheCGNews.in का फोकस सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज पर नहीं, बल्कि उन खबरों पर है जो आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं – गांव, कस्बों, पंचायत, युवाओं, शिक्षा, रोजगार, राजनीति, संस्कृति और जन-समस्याओं की सच्ची झलक यहाँ देखने को मिलती है। TheCGNews.in की खास बातें: • ✅ छत्तीसगढ़ की हर कोने से रिपोर्टिंग • ✅ सिर्फ सनसनी नहीं – समाधान की पत्रकारिता • ✅ युवाओं और किसानों की आवाज़ • ✅ भ्रष्टाचार, विकास और बदलाव की असली रिपोर्ट • ✅ हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में खबरें

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई