
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को और पारदर्शी और मतदाता-अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के मतपर्चों पर उम्मीदवारों की तस्वीरें रंगीन दिखाई देंगी और नाम बड़े अक्षरों में लिखे जाएंगे। यह बदलाव सबसे पहले आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से लागू होगा और उसके बाद देशभर में सभी चुनावों में अपनाया जाएगा।
मतदाताओं की सुविधा के लिए बदलाव
चुनाव आयोग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य मतदाताओं की सुविधा सुनिश्चित करना है। कई बार बूढ़े मतदाताओं, दृष्टि संबंधी कठिनाई वाले लोगों या पहली बार वोट डालने वालों को नाम और फोटो पहचानने में दिक्कत होती थी। अब रंगीन तस्वीरें और बड़े अक्षरों में नाम होने से उम्मीदवारों की पहचान अधिक स्पष्ट होगी और मतदान के दौरान भ्रम की संभावना कम होगी।
नियमों में संशोधन
आयोग ने इसके लिए Conduct of Elections Rules, 1961 में संशोधन किया है। नए नियमों के तहत उम्मीदवार की फोटो का आकार ऐसा होगा कि उसका चेहरा लगभग तीन-चौथाई हिस्से में साफ दिखाई दे। सभी उम्मीदवारों के नाम एक जैसे बड़े फ़ॉन्ट साइज (लगभग 30 पॉइंट, बोल्ड) में लिखे जाएंगे। इसके अलावा, NOTA विकल्प भी उसी तरह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
बिहार से शुरुआत क्यों
चुनाव आयोग ने यह सुधार सबसे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में लागू करने का निर्णय लिया है। आयोग का मानना है कि बिहार जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण राज्य में यह प्रयोग सफल रहा तो आगे अन्य राज्यों और फिर लोकसभा चुनाव में भी इसे लागू करना आसान होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतपत्रों की प्रिंटिंग अब बेहतर गुणवत्ता के कागज़ (70 GSM) पर होगी ताकि लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे। विधानसभा चुनावों में इसके लिए गुलाबी रंग के कागज का इस्तेमाल किया जाएगा।
पारदर्शिता और विश्वास में इजाफा
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग का यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत करेगा। अब मतदाताओं के सामने उम्मीदवार की पहचान को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं रहेगी। बूथ पर फोटो और नाम साफ होने से मतदान प्रक्रिया में त्रुटियों की गुंजाइश घटेगी। यह बदलाव चुनावी पारदर्शिता और जनविश्वास को और गहरा करेगा।
लागत और चुनौतियाँ
हालाँकि इस सुधार के साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। रंगीन फोटो और बेहतर कागज की वजह से चुनाव आयोग पर खर्च का बोझ बढ़ सकता है। साथ ही, समय पर उम्मीदवारों की सही और हालिया तस्वीर उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। चुनाव सामग्री की प्रिंटिंग और दूरदराज़ इलाकों तक उसकी आपूर्ति के दौरान गुणवत्ता बनाए रखना आयोग के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।
निष्कर्ष
बिहार से शुरू होने वाली यह नई पहल आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अहम कदम साबित हो सकती है। रंगीन फोटो और बड़े अक्षरों में नाम से न केवल मतदाताओं को सुविधा होगी बल्कि मतदान प्रक्रिया और अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनेगी। आयोग को उम्मीद है कि इस बदलाव से मतदाता सहभागिता में भी इजाफा होगा और लोग मतदान को लेकर ज्यादा उत्साहित होंगे।
Author: THE CG NEWS
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