
एशिया के कई हिस्सों में इस साल का सबसे भीषण तूफान ‘रगासा’ ने ताइवान, फिलीपींस के उत्तरी भाग और हांगकांग में भारी तबाही मचाई। इस शक्तिशाली तूफान ने अब तक 25 लोगों की जान ले ली है जबकि 20 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। तूफान के गुजर जाने के बाद भी इन इलाकों में चारों तरफ तबाही और विनाश के दृश्य देखने को मिल रहे हैं।
ताइवान में सबसे ज्यादा जनहानि
तूफान रगासा का सबसे ज्यादा असर ताइवान में देखा गया जहां अकेले 14 लोगों की मौत हुई है। दर्जनों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तूफान के साथ आई तेज हवाओं ने सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचाया और बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी। कई जगहों पर पेड़ उखड़कर गिर गए और वाहन पानी में बह गए। आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार, ताइवान में 3.8 मीटर तक ऊंची लहरें उठीं, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए।
हांगकांग में 14 इंच से ज्यादा बारिश
हांगकांग में रगासा ने ऐतिहासिक बारिश दर्ज करवाई। केवल एक ही दिन में 350 मिलीमीटर (14 इंच) से ज्यादा बारिश हुई, जो 1884 के बाद अगस्त महीने की एक दिन की सबसे बड़ी बारिश मानी जा रही है। शहर में जलभराव इतना गंभीर हो गया कि कई इलाके पूरी तरह से डूब गए। लग्जरी होटलों से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठान और मेट्रो स्टेशन तक पानी में भर गए। एक बड़े होटल की लॉबी में भी पानी भर गया, जिसके चलते लाखों डॉलर का नुकसान हुआ।
चीन और फिलीपींस में भी असर
चीन के गुआंगडोंग और फुजियान प्रांतों में भी रगासा का असर दिखा। यहां 20 लाख से अधिक लोगों को राहत शिविरों में भेजा गया। गुआंगडोंग के तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया, जिससे मछली पालन और बंदरगाहों को भारी नुकसान हुआ। हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और रेल सेवाओं को भी रोकना पड़ा। फिलीपींस में भी तूफान ने ग्रामीण इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन को जन्म दिया, जिससे फसलें चौपट हो गईं।
आर्थिक नुकसान अरबों में
अभी तक हुए आकलन के मुताबिक, तूफान रगासा से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। हांगकांग में ही लगभग 342 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित नुकसान बताया जा रहा है। ताइवान और चीन में सड़कों, पुलों, बिजली लाइनों और जल आपूर्ति व्यवस्था को भारी क्षति पहुंची है। कृषि क्षेत्र में भी भारी नुकसान दर्ज किया गया है।
लगातार चेतावनी और बचाव कार्य
हांगकांग और चीन के मौसम विभागों ने इस दौरान ‘ब्लैक रेनस्टॉर्म’ चेतावनी जारी की थी, जो वहां की सबसे गंभीर चेतावनी प्रणाली है। यह अलर्ट तब जारी किया जाता है जब हालात सामान्य जीवन के लिए बेहद खतरनाक हो जाते हैं। चेतावनी के बीच हजारों बचावकर्मी राहत और पुनर्वास कार्य में जुटे हुए हैं। नावों और हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि रगासा जैसे शक्तिशाली तूफान अब जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत हैं। समुद्र के बढ़ते तापमान और मौसम के असंतुलन के कारण ऐसे तूफानों की तीव्रता और आवृत्ति दोनों में वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र को और भी भीषण तूफानों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रभावित देशों में आपात स्थिति
ताइवान, हांगकांग और चीन के कई हिस्सों में आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी गई है। स्कूलों और कार्यालयों को बंद रखा गया है। हजारों लोग अभी भी बिजली और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया गया है, लेकिन भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर पहुंच बनाना मुश्किल हो रहा है।
तूफान रगासा ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदाएं कितनी विनाशकारी हो सकती हैं। लाखों लोग बेघर हो गए हैं और हजारों की रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो चुकी है। एशियाई देशों के लिए यह आपदा आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन से निपटने की चुनौती की भी याद दिलाती है।
Author: THE CG NEWS
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