कोल्ड्रिफ कफ सिरप विवाद: छिंदवाड़ा की 11 मौतों के बाद केरल में बैन, राजस्थान में तीसरी मौत; मंत्री बोले — दवा ज़िम्मेदार नहीं

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मध्य प्रदेश (MP) के छिंदवाड़ा में कथित विषाक्त कफ सिरप सेवन से अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बीच, तमिलनाडु और एमपी के बाद केरल सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। राजस्थान में भी तीसरी मौत की पुष्टि हुई है और विवाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि, राज्य मंत्री इस दवा को दोषी ठहराने से बचते हुए कह रहे हैं कि प्रारंभिक जांच में “दवा में खामी नहीं मिली”।

छिंदवाड़ा में हादसा — बच्चों की मौत

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में पिछले महीने बच्चों को खांसी की दवाएँ दी गईं, जिनके बाद उनमें तीव्र गुर्दा (किडनी) विकार सामने आए। कुछ दिनों में उनकी हालत बिगड़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया। प्रारंभिक तमाम रिपोर्टों के अनुसार अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। 

मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए पूरे राज्य में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। छिंदवाड़ा में उपलब्ध सभी स्टॉक जब्त किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृत बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और बीमार बच्चों का इलाज पूरा राज्य सरकार द्वारा करवाने की घोषणा की है। 

केरल का त्वरित कदम

तमिलनाडु के बाद केरल सरकार ने कदम बढ़ाते हुए कोल्ड्रिफ कफ सिरप के वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि, भले ही उक्त दवा का संदिग्ध बैच केरल में वितरित नहीं हुआ हो, वह एहतियातन इस मामले में पूरी सतर्कता बरत रही है। 

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तमिलनाडु में भी दवा पर बैन लगाया जा चुका है क्योंकि रिपोर्टों में उस दवा में डाइएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) नामक विषाक्त रसायन की मात्रा अनुमत स्तर से अधिक पाई गई है। 

राजस्थान में तीसरी मौत, कार्रवाई की मांग

राजस्थान में भी हाल में एक और बच्चे की मौत हुई है, जिससे इस सिरप विवाद में मृतकों का आँकड़ा तीसरा हो गया है। 

राजस्थान सरकार ने कायसन फार्मा द्वारा निर्मित 19 दवाओं की बिक्री रोकने के आदेश दिए हैं और राज्य स्तर पर दवा नियंत्रक को निलंबित कर दिया है। 

राज्य स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में दवा में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है और बच्चों की मौतों का कारण दवा नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को यह दवा निजी स्तर पर दी गई थी, और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका इसमें नहीं है। 

केंद्र की ओर से चेतावनी और जांच

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोल्ड्रिफ सिरप में नमूनों की जांच के बाद DEG (डाइएथिलीन ग्लायकॉल) की मात्रा अनुमत सीमाओं से अधिक पाई गई है, जो घातक साबित हो सकती है। 

उच्चस्तरीय विशेषज्ञों की टीम (NIV, ICMR, AIIMS-नागपुर, ENVIRONMENTAL एजेंसियाँ) इस घटना की विस्तृत जांच कर रही है। 

सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दें। 

बयान — मंत्री बोले: “दवा कारण नहीं”

मध्य प्रदेश और राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री इस मामले में बचाव की पोजीशन पर दिखे। उन्होंने जांच रिपोर्टों के हवाले से कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं कि किस वजह से बच्चों की मौत हुई। दोनों ने यह कहकर तत्काल निष्कर्ष देने से इंकार किया कि दवा ही दोषी है। 

परिजन इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और दुष्कर्म की आशंका के साथ दोषियों को बख्शे जाने का आरोप लगा रहे हैं। प्रशासन पर कार्रवाई की धीमी गति को लेकर तीखी नाराज़गी है। 

क्या कारण हो सकता है?

विश्लेषकों का कहना है कि दवा में डाइएथिलीन ग्लायकॉल की मिश्रण संभावना (contamination) की जांच प्राथमिक रूप से की जा रही है। DEG एक औद्योगिक घटक है, जिसे दवा में न होना चाहिए, क्योंकि यह गुर्दों को नुकसान पहुंचा सकता है। 

हालाँकि, कुछ नमूनों में इस विषाक्त पदार्थ नहीं पाया गया है, और सरकार ने यह भी कहा है कि MP से लिए गए कुछ नमूनों में DEG या Ethylene Glycol नहीं मिला। 

निष्कर्ष और आगे की राह

यह मामला भारतीय दवा नियमन और स्वास्थ्य जांच व्यवस्था की बड़ी संवेदनशीलता को उजागर करता है। एक ओर राज्यों द्वारा बैन व जब्ती की कार्रवाई हो रही है, तो दूसरी ओर मृतकों की परिवारों की मांग है कि दोषियों को कड़ी सज़ा मिले।

देश भर में ऐसी दवाओं की निगरानी बढ़ाने की जरूरत अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गई है। इस घटना के परिणामों और जांच की रिपोर्ट आने पर ही स्पष्ट होगा कि किन कारकों ने इन मासूम बच्चों की जान ली।

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Author: THE CG NEWS

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