“आई लव मोदी” कह सकते हैं, लेकिन “आई लव मोहम्मद” नहीं: ओवैसी का आरोप

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हैदराबाद, 3 अक्टूबर 2025: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के संभल में मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद और “आई लव मोहम्मद” के पोस्टर को लेकर देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं।

हैदराबाद में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, “इस देश में ‘आई लव मोदी’ कह सकते हैं, लेकिन ‘आई लव मोहम्मद’ नहीं कह सकते।” उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक प्रतीकों और अभिव्यक्तियों पर आपत्ति जताई जाती है, जबकि अन्य धार्मिक प्रतीकों पर कोई आपत्ति नहीं होती।

संभल मस्जिद विवाद पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा, “हमारी मस्जिदें छीनी जा रही हैं। यह हमारे धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है।” उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करें और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचें।

इससे पहले, उत्तर प्रदेश के बरेली में “आई लव मोहम्मद” के पोस्टर को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। ओवैसी ने इन घटनाओं की निंदा की और कहा कि इस प्रकार की हिंसा से समाज में तनाव बढ़ता है।

ओवैसी ने सरकार से सवाल किया, “क्यों कुछ धार्मिक प्रतीकों और अभिव्यक्तियों पर आपत्ति जताई जाती है, जबकि अन्य पर नहीं?” उन्होंने यह भी कहा कि यह असमानता समाज में धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देती है और संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

इस विवाद ने देशभर में धार्मिक अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने इस पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की है।

ओवैसी के इस बयान से एक बार फिर यह सवाल उठता है कि क्या भारत में सभी धर्मों और समुदायों को समान रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है, या कुछ विशेष समुदायों की अभिव्यक्तियों को दबाया जाता है।

यह मामला अब न्यायपालिका और मानवाधिकार संगठनों के लिए एक चुनौती बन गया है कि वे इस मुद्दे पर निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से विचार करें और यह सुनिश्चित करें कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन न हो।

इस बीच, ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा करें और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचें। उन्होंने कहा, “हमें कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।”

इस विवाद के बाद, सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है और सभी संबंधित पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

यह मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है और यह देखना होगा कि सरकार और न्यायपालिका इस पर किस प्रकार की कार्रवाई करती है।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि “आई लव मोदी” और “आई लव मोहम्मद” जैसे अभिव्यक्तियों पर समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त हो।

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Author: THE CG NEWS

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