कर्नाटक के चित्तपुर में RSS के मार्च को अनुमति नहीं: भीम आर्मी की रैली पर भी रोक, प्रियांक खड़गे बोले- ‘RSS कार्यकर्ताओं ने दी गाली और धमकी’

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कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के चित्तपुर में रविवार को प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पथसंचलन (मार्च) को जिला प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसी तरह, भीम आर्मी की रैली पर भी प्रशासन ने रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है, क्योंकि चित्तपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री प्रियांक खड़गे का विधानसभा क्षेत्र है।

प्रशासन ने दोनों संगठनों को दी मनाही

कलबुर्गी जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए RSS और भीम आर्मी दोनों को पथसंचलन की अनुमति नहीं दी। अधिकारियों ने बताया कि दोनों संगठनों के कार्यक्रम एक ही दिन और एक ही इलाके में प्रस्तावित थे, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो सकता था। पुलिस ने कहा कि किसी भी स्थिति में सांप्रदायिक तनाव या टकराव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, इसलिए अनुमति नहीं दी गई।

प्रियांक खड़गे ने RSS पर लगाया आरोप

कर्नाटक के आईटी और ग्रामीण विकास मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस मुद्दे पर RSS पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि RSS के कुछ कार्यकर्ता प्रशासनिक अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं को गाली दे रहे थे और धमकियाँ भी दीं। खड़गे ने कहा, “RSS को संविधान और कानून पर भरोसा रखना चाहिए, धमकी और दबाव की राजनीति से कुछ हासिल नहीं होगा। अगर कोई संगठन कानून के खिलाफ जाकर प्रदर्शन करेगा, तो प्रशासन को कार्रवाई करनी ही पड़ेगी।”

RSS ने जताई नाराजगी, कहा – ‘राजनीतिक पक्षपात’

RSS के स्थानीय पदाधिकारियों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह प्रशासनिक नहीं बल्कि “राजनीतिक निर्णय” है। संघ नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही आवेदन देकर शांतिपूर्ण तरीके से पथसंचलन की अनुमति मांगी थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के दबाव में पुलिस ने इसे खारिज कर दिया। RSS की ओर से कहा गया कि “हमारा पथसंचलन हर साल आयोजित होता है, यह सांस्कृतिक और अनुशासित कार्यक्रम होता है। इस बार इसे रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।”

भीम आर्मी ने भी जताया विरोध

दूसरी ओर, भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने भी प्रशासन के फैसले को अनुचित बताया। उनका कहना है कि सरकार ने RSS और भीम आर्मी दोनों को एक ही तराजू में तोल दिया है, जबकि उनका कार्यक्रम सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों से जुड़ा था। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार “दोनों पक्षों को खुश करने की राजनीति” कर रही है और इससे लोकतंत्र की भावना को ठेस पहुँच रही है।

पुलिस की सख्त निगरानी

चित्तपुर में पुलिस ने एहतियातन सुरक्षा बढ़ा दी है। अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने किसी भी प्रकार की भीड़ या जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दोनों संगठनों से संवाद जारी है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

राजनीतिक असर

कर्नाटक में यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। भाजपा नेताओं ने इसे “विचारधारा के दमन” की राजनीति बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि “कांग्रेस सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को प्रशासनिक दबाव से रोकने की कोशिश कर रही है। अगर RSS को मार्च की अनुमति नहीं दी जाती, तो यह लोकतंत्र के खिलाफ है।”

वहीं, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए सही कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी संगठन को हिंसा या नफरत फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कुल मिलाकर, चित्तपुर में RSS और भीम आर्मी दोनों की रैली पर लगी रोक ने कर्नाटक की राजनीति को गरमा दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे सरकार का “पक्षपातपूर्ण रवैया” बता रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे “शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने” का निर्णय बता रहा है।

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Author: THE CG NEWS

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