
आज देशभर में दिवाली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए तैयारियां चरम पर हैं। छत्तीसगढ़ के भिलाई-दुर्ग समेत आसपास के इलाकों में बाजारों में जबरदस्त रौनक देखी जा रही है। लोगों ने सुबह से ही घरों की सजावट शुरू कर दी है और शाम होते ही दीपों की रोशनी से पूरा शहर जगमगाने वाला है। इस बार लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 37 मिनट से लेकर रात 7 बजकर 33 मिनट तक का बताया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस अवधि में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन की वर्षा होती है।
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
भिलाई और दुर्ग क्षेत्र के पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि आज यानी रविवार को दोपहर 3 बजकर 10 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन दोपहर 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। हालांकि, लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ समय शाम 5:37 बजे से रात 7:33 बजे तक का है। इस दौरान स्थिर लग्न (वृष लग्न) रहेगा, जो माता लक्ष्मी की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
पंडितों के अनुसार, लक्ष्मी पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद स्थिर लग्न में पूजा करना सबसे शुभ रहता है, क्योंकि इस काल में धन की स्थिरता बनी रहती है। इसके बाद रात 8 बजे से 10 बजे तक भी पूजन किया जा सकता है, लेकिन प्रमुख मुहूर्त में पूजा करने से परिणाम अधिक शुभदायी होते हैं।
लक्ष्मी पूजन विधि: घर में धन की बरसात का मार्ग
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शर्मा (दुर्ग) के अनुसार, दिवाली की शाम घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाकर दीप जलाना शुभ माना जाता है। घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को विशेष रूप से साफ-सुथरा रखें, क्योंकि यह लक्ष्मी प्रवेश की दिशा होती है। पूजा स्थल पर लाल या गुलाबी कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की प्रतिमा स्थापित करें।
पहले गणेश जी का पूजन करें, फिर लक्ष्मी जी का। चांदी या सोने के सिक्कों को पूजा थाल में रखें और उन्हें हल्दी-कुमकुम से पूजें। लक्ष्मी जी को कमल का फूल, पान, सुपारी, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करें। शाम को 11 दीपक जलाना बहुत शुभ माना गया है — चारों दिशाओं में एक-एक दीपक, एक तुलसी के नीचे, एक घर के प्रवेश द्वार पर और एक पूजा स्थल पर रखना चाहिए।
भिलाई-दुर्ग में सजावट और रोशनी की धूम
दुर्ग और भिलाई के बाजारों में दिवाली की चमक शनिवार शाम से ही नजर आने लगी थी। नेहरू नगर, सुपेला मार्केट, सिविक सेंटर और स्टेशन रोड इलाकों में रंग-बिरंगी झालरों, दीयों और पूजा सामग्री की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ी हुई है। दुकानदारों ने बताया कि इस बार खासतौर पर पर्यावरण-हितैषी दीये, मिट्टी की लक्ष्मी-गणेश मूर्तियां और देसी रोशनी की लाइटें खूब बिक रही हैं।
भिलाई नगर निगम ने सड़कों और प्रमुख चौक-चौराहों को LED लाइटों से सजाया है। सुपेला चौक और स्टेशन रोड पर रोशनी की झिलमिलाहट से पूरा इलाका जगमगा उठा है। घरों में लोग सुबह से सफाई और सजावट में जुटे हैं। कई जगहों पर बच्चों ने घरों के बाहर रंगोली बनाई और शाम को दीप सजाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मां लक्ष्मी के आगमन के संकेत
पंडित राजेश तिवारी (भिलाई) के अनुसार, अगर दिवाली की रात घर में दीपक की लौ बिना हवा के भी लगातार जलती रहे, या लक्ष्मी जी की तस्वीर के पास अचानक सुगंध महसूस हो, तो यह मां के आगमन का संकेत होता है। इस दिन घर में किसी भी तरह की बहस या झगड़े से बचना चाहिए। साथ ही, कूड़ा या गंदगी को घर से बाहर निकाल देना चाहिए क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
रात को लक्ष्मी पूजा के बाद घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर लाल कपड़े में सिक्के बांधकर टांगने से धन का प्रवाह बढ़ता है। लक्ष्मी जी को कमल गट्टा और हल्दी के दानों की माला अर्पित करना शुभ माना गया है।
राज्य सरकार ने लोगों से की अपील
भिलाई और दुर्ग प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पटाखे जलाने के दौरान सावधानी बरतें और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं। प्रशासन ने कहा कि दिवाली का असली आनंद रोशनी और खुशियों से है, धुएं और शोर से नहीं। इस बार स्थानीय बाजारों में ‘ग्रीन पटाखों’ की उपलब्धता बढ़ाई गई है। इसके साथ ही, निगम की टीमें सफाई व्यवस्था में जुटी हैं ताकि दिवाली की रात शहर पूरी तरह स्वच्छ और उज्ज्वल नजर आए।
धन की देवी की पूजा से मिलते हैं विशेष लाभ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दिवाली की रात धन की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और जो घर साफ-सुथरा, सजा हुआ और दीपों से प्रकाशित होता है, वहां स्थायी रूप से निवास करती हैं। लक्ष्मी पूजन के दौरान कुबेर जी की उपासना से धन प्राप्ति के योग बनते हैं, जबकि गणेश जी की पूजा से कार्यों में सफलता मिलती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जो लोग व्यवसाय से जुड़े हैं, उन्हें लक्ष्मी पूजा के समय अपने खाता-बही, कैश बॉक्स और तिजोरी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। ऐसा करने से वर्षभर आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
पूजा के समय ये कार्य बिल्कुल न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी पूजा के दिन झगड़ा, क्रोध, या किसी की बुराई करने से लक्ष्मी जी नाराज होती हैं। रात में झाड़ू लगाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इसे ‘धन हानि’ का कारण माना जाता है। पूजा के दौरान काले या गहरे रंग के कपड़े न पहनें, बल्कि गुलाबी, लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
लक्ष्मी पूजन के बाद करें यह उपाय
भिलाई के पंडित सुनील शुक्ला के अनुसार, लक्ष्मी पूजन के बाद घर के दरवाजे पर दो दीपक जलाकर रख दें — एक बाहर और एक अंदर। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। रात 12 बजे के बाद घर के मुख्य दरवाजे के पास “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” का 108 बार जाप करने से पूरे वर्ष धन और सौभाग्य बना रहता है।
दिवाली की रात भिलाई-दुर्ग में होगा दीपोत्सव का नजारा
शहर के प्रमुख मंदिरों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। मैत्री गार्डन रोड स्थित लक्ष्मी मंदिर, सिविक सेंटर के गणेश मंदिर, और चंद्रा मौर्या मंदिर परिसर को फूलों और लाइटों से सजाया गया है। शाम को भजन संध्या और आरती में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
निष्कर्ष
भिलाई-दुर्ग में दिवाली की शाम मां लक्ष्मी की पूजा के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह है। हर घर में दीपों की जगमगाहट के साथ खुशहाली की प्रार्थना होगी। शाम 5:37 से 7:33 बजे तक का शुभ मुहूर्त इस बार हर श्रद्धालु के लिए विशेष रहेगा, क्योंकि यही वह समय है जब मां लक्ष्मी घर-घर धन, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देने आती हैं।
इस दिवाली, मां लक्ष्मी के स्वागत में दीप जलाएं, मन को पवित्र करें और अपने जीवन में उजाला फैलाएं — क्योंकि जहां प्रकाश है, वहीं लक्ष्मी का वास है।
Author: THE CG NEWS
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