
छत्तीसगढ़ में बुधवार सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की संयुक्त टीमों ने खनन कारोबारियों और सरकारी सप्लायरों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। रायपुर, दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव जिले में एकसाथ छापेमारी की गई। यह कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) घोटाले से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर की जा रही है।
रायपुर में टीम ने पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इन्क्लेव में दबिश दी, जहां कारोबारी के ठिकानों से वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है। वहीं राजनांदगांव में एक साथ तीन ठिकानों पर छापेमारी हुई। इनमें भारत माता चौक स्थित राधाकृष्ण अग्रवाल, सत्यम विहार निवासी यश नाहटा और कामठी लाइन स्थित ललित भंसाली के ठिकाने शामिल हैं। तीनों ही कारोबारी कोल माइंस, टेंट हाउस और सरकारी सप्लाई से जुड़े बताए जा रहे हैं।
दुर्ग जिले में महावीर नगर निवासी कारोबारी मनीष पारख के यहां रेड की गई, जबकि धमतरी में भी ACB-EOW की टीमें दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई हैं। इस संयुक्त अभियान में करीब 10 गाड़ियों में अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
DMF घोटाले से जुड़ी कड़ियां
ACB और EOW की यह कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) के दुरुपयोग की जांच से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि फंड से जुड़ी सप्लाई और टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुई हैं। सरकारी विभागों में DMF फंड के अंतर्गत खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं में कमीशन का बड़ा खेल सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, एजेंसियां फिलहाल शासकीय सप्लाई के बिल, टेंडर फाइल, भुगतान वाउचर और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। शुरुआती जांच में कई संदिग्ध फर्मों के नाम सामने आए हैं, जिनसे सरकारी विभागों को सप्लाई दिखाई गई, जबकि वस्तुतः कोई काम नहीं हुआ।

575 करोड़ के DMF स्कैम का खुलासा
EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि कोरबा जिले में DMF फंड से 575 करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितताएं हुई हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कई फर्जी ठेकेदारों और बिचौलियों ने अफसरों और नेताओं के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि DMF फंड के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार को आसान बनाने के लिए फंड खर्च के नियमों में बदलाव किया गया था। नए नियमों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की कैटेगरी जोड़ी गई, ताकि इन्हीं के बहाने अधिकतम कमीशन वाले टेंडर को मंजूरी दी जा सके।
ACB द्वारा रायपुर कोर्ट में पेश किए गए 6,000 पेज के चालान में यह स्पष्ट हुआ है कि कोरबा DMF घोटाले में कई अधिकारी शामिल थे। जांच में सामने आया कि कलेक्टर को 40%, सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब-इंजीनियर को 2% तक का कमीशन दिया गया था।

25 से 40 प्रतिशत कमीशन का खुलासा
ED और EOW की जांच में पाया गया कि ठेकेदारों ने टेंडर के एवज में 25% से 40% तक कमीशन अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को दिया था। इन पैसों की एंट्री “अकोमोडेशन एंट्री” के रूप में की गई, ताकि घोटाले की रकम को वैध दिखाया जा सके।
तलाशी के दौरान जांच टीमों ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, फर्जी कंपनियों के दस्तावेज और नकदी बरामद की। अब तक 76.50 लाख रुपए नकद जब्त किए गए हैं, जबकि 8 बैंक खातों में जमा 35 लाख रुपए को फ्रीज कर दिया गया है।

EOW ने दर्ज किया केस
EOW ने ED की रिपोर्ट के आधार पर IPC की धारा 120-बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है। इसमें कई ठेकेदारों और बिचौलियों के नाम शामिल हैं, जिनमें संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी, मनोज द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर प्रमुख हैं।
एजेंसियों को संदेह है कि इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी हुई है, जो खनन, निर्माण और सप्लाई के नाम पर सरकारी अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाई गई।

आधिकारिक बयान का इंतजार
हालांकि अभी तक ACB या EOW की ओर से कोई आधिकारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन छापेमारी के बाद से खनन और सप्लाई कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। यह कार्रवाई राज्य में DMF घोटाले से जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी रेड मानी जा रही है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन जिलों में फर्जी टेंडर के जरिए फंड की हेराफेरी की गई और इसमें किन राजनीतिक या प्रशासनिक चेहरों की भूमिका रही।
Author: THE CG NEWS
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