
आजकल घर से बाहर निकलते ही लोग सबसे पहले पैकेज्ड वॉटर यानी बोतलबंद पानी खरीदते हैं। चाहे सड़क यात्रा हो, ऑफिस मीटिंग या कोई बड़ा इवेंट, पानी की प्लास्टिक बोतल लगभग हर जगह नजर आती है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि इन बोतलों पर भी ‘एक्सपायरी डेट’ लिखी होती है? सवाल उठता है — जब पानी खराब नहीं होता, तो आखिर इसकी भी एक्सपायरी क्यों होती है? विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कारण पानी नहीं बल्कि उसकी पैकेजिंग यानी प्लास्टिक की बोतल होती है।
पानी नहीं, बोतल होती है ‘एक्सपायर’
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पानी प्राकृतिक रूप से कभी खराब नहीं होता, लेकिन जिस बोतल में इसे भरा जाता है, उसकी एक सीमित उम्र होती है। ज़्यादातर पैकेज्ड वॉटर बोतलें पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) प्लास्टिक से बनी होती हैं, जो समय के साथ अपनी गुणवत्ता खो देती हैं। गर्मी, धूप और नमी के संपर्क में आने से इस प्लास्टिक से केमिकल पदार्थ (जैसे बिसफेनॉल A और माइक्रोप्लास्टिक) पानी में घुलने लगते हैं। यही कारण है कि कंपनियां बोतल की सुरक्षा अवधि तय करती हैं और उस पर एक्सपायरी डेट लिखती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि आमतौर पर पानी की बोतल की एक्सपायरी डेट 6 महीने से 1 साल तक होती है। इसका मतलब यह नहीं कि इसके बाद पानी पीने लायक नहीं रहता, बल्कि यह चेतावनी होती है कि इतनी अवधि के बाद बोतल की रासायनिक स्थिरता घटने लगती है।
गर्मी और धूप में रखी बोतलें सबसे ज़्यादा नुकसानदायक
वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर पैकेज्ड वॉटर को लंबे समय तक धूप में या गर्म जगह पर रखा जाए तो उसमें मौजूद माइक्रोप्लास्टिक और रासायनिक तत्व तेजी से बढ़ जाते हैं। ये तत्व पानी में घुलकर शरीर में पहुंचते हैं, जिससे किडनी, लीवर और हार्मोनल बैलेंस पर असर पड़ सकता है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने कई बार चेतावनी दी है कि पैकेज्ड वॉटर को हमेशा ठंडी और छायादार जगह पर रखा जाए। इसके अलावा, बोतल खोलने के बाद इसे 24 घंटे के भीतर इस्तेमाल कर लेना चाहिए। खुली बोतल लंबे समय तक रखने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं।
पानी की गुणवत्ता से ज़्यादा जरूरी है पैकेजिंग की स्थिति
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बोतलबंद पानी की सबसे बड़ी चिंता उसकी पैकेजिंग होती है। यदि बोतल पर खरोंचें हैं, वह मुड़ी हुई है या धूप में रखी गई है, तो पानी भले ही शुद्ध दिखे, लेकिन वह दूषित हो सकता है।
इसके अलावा, कई बार दुकानदार पुराने स्टॉक की बोतलें बेच देते हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट नजदीक होती है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता को खुद सतर्क रहना चाहिए। बोतल खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट, सील और कैप की स्थिति जरूर जांचें।
क्या दोबारा इस्तेमाल करना सुरक्षित है?
अक्सर लोग एक बार खरीदी गई पानी की बोतल को बार-बार इस्तेमाल करते हैं, जो बेहद खतरनाक आदत है। रिसर्च से पता चला है कि बार-बार इस्तेमाल करने से PET बोतल की सतह पर बैक्टीरिया, फंगस और माइक्रोप्लास्टिक जमा हो जाते हैं। यह संक्रमण पैदा कर सकते हैं और पेट संबंधी बीमारियों जैसे डायरिया, फूड पॉइजनिंग और गैस्ट्रिक इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पैकेज्ड वॉटर की बोतल को एक बार उपयोग के बाद फेंक देना चाहिए। घर में पानी स्टोर करने के लिए स्टील, कांच या BPA-फ्री प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल सुरक्षित होता है।
FSSAI के दिशा–निर्देश क्या कहते हैं
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के मानकों के अनुसार, कोई भी पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर कंपनी तभी बाजार में अपना उत्पाद बेच सकती है जब उसे IS:14543 कोड के तहत प्रमाणन प्राप्त हो। इस मानक में पैकेजिंग, फिल्ट्रेशन, स्टोरेज और वितरण से जुड़ी सख्त शर्तें हैं।
इसके अलावा, हर पैकेज्ड वॉटर बोतल पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI लाइसेंस नंबर छापना अनिवार्य है। यदि किसी बोतल पर ये विवरण नहीं हैं, तो वह अवैध रूप से बेची जा रही मानी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों के अनुसार, यदि पानी की बोतल की एक्सपायरी निकल चुकी है या वह लंबे समय से धूप में रखी हुई है, तो उसे पीने से बचें। ऐसे पानी में रासायनिक पदार्थ घुलकर शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह धीरे-धीरे हार्मोनल असंतुलन, थकान, सिरदर्द, और इम्यून सिस्टम की कमजोरी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घर या ऑफिस में हमेशा फ़िल्टर किया हुआ ताज़ा पानी पीना ही सबसे सुरक्षित है। बोतलबंद पानी सिर्फ यात्रा या आपात स्थिति में इस्तेमाल करें और उसकी एक्सपायरी डेट जरूर देखें।
Author: THE CG NEWS
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