
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को एक उपभोक्ता मामले में नोटिस जारी किया गया है। राजस्थान के जिला उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय कोटा ने उन्हें तथा पान मसाला निर्माता कंपनी राजश्री पान मसाला को पूछताछ के लिए तलब किया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस कंपनी के विज्ञापन में यह कहा गया है कि “दाना-दाना में है केसर का दम” (पान मसाले में केसर मौजूद है) लेकिन पाउच की कीमत मात्र ₹5 है, जबकि केसर की प्रैक्टिकल कीमत हजारों रुपये प्रति किलो होती है।
विज्ञापन पर विवाद
शिकायत के अनुसार, पान मसाले के विज्ञापन में दावा किया गया है कि हर एक दाना-दाना में केसर की तासीर मौजूद है। लेकिन शिकायतकर्ता ने तर्क प्रस्तुत किया है कि केसर लगभग ₹4 लाख प्रति किलो तक का आता है और ऐसे में ₹5 के पाउच में केसर शामिल होना आर्थिक दृष्टि से असहाय्य है। इस पर न्यायालय ने कंपनी और सलमान खान से जवाब मांगा है कि यह दावा कैसे व्यावहारिक हो सकता है।
नोटिस की प्रक्रिया
कोटा की अदालत ने राजश्री पान मसाला निर्माता कंपनी तथा सलमान खान को नोटिस जारी कर 27 नवम्बर तक उपस्थिति देने या हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि यदि उत्तर नहीं मिला तो यह मामला एक्स पार्टे (बिना जवाब के) सुनवाई के अधीन हो सकता है। शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि पान मसाले के विज्ञापन को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा विज्ञापन उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रहा है।
स्वास्थ्य–आरोप और विज्ञापन की नैतिकता
शिकायत में यह भी बताया गया है कि पान मसाला व तंबाकू आधारित उत्पाद युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। इस विज्ञापन की पृष्ठभूमि में शिकायतकर्ता ने कहा है कि उपभोक्ताओं को ‘केसर वाला पान मसाला’ कह-कर लालच में लिया जा रहा है जबकि वास्तविकता इससे विपरीत है। उन्होंने कहा है कि दिखावे से अधिक प्रभावशाली होता है विज्ञापन में दिए गए कथन का सच होना।
सलमान खान की ब्रांड संबद्धता
सलमान खान इस पान मसाला ब्रांड के ब्रांड एम्बेसडर बताए जा रहे हैं। शिकायत में यह मामला उठाया गया है कि अभिनेता द्वारा यह दावा प्रचारित होना उपभोक्ताओं में विश्वास जगाता है और उसकी विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। हालांकि, सलमान खान या कंपनी की ओर से अभी तक सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान नहीं आया है।
उद्योग और नियामक दृष्टिकोण
विवाद में यह सवाल उठता है कि क्या विज्ञापन में दिए गए दावे को उत्पाद के मूल्य-आकार, सामग्री लागत और वास्तविकता के अनुरूप मापा गया है। यह मामला ‘सतही विज्ञापन’ तथा ‘भ्रामक प्रचार’ की श्रेणी में आता है, जहाँ उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा हेतु उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत कार्रवाई संभव है।
आगे की प्रक्रिया
अगली सुनवाई की तारीख की घोषणा अदालत द्वारा की जाएगी और तब दोनों पक्षों को अपने तर्क रखने का अवसर मिलेगा। अदालत के समक्ष यह साबित करना होगा कि विज्ञापन में किए गए दावे विज्ञापित उत्पाद के गुण और सामग्री से मेल खाते हैं या नहीं। यदि दावे झूठे पाए जाते हैं, तो कंपनी तथा प्रमोटर पर जुर्माना, विज्ञापन प्रतिबंध या अन्य कार्रवाई हो सकती है।
इस प्रकार, यह मामला न सिर्फ एक फिल्म स्टार–ब्रांड संबद्धता का विवाद बन गया है बल्कि विज्ञापन की सत्यता, उपभोक्ता भ्रम एवं स्वास्थ्य–प्रचार की नैतिकता जैसे व्यापक प्रश्न भी खड़े कर गया है। उपभोक्ता और विज्ञापन–नियामक दोनों ही नजर इस मामले पर टिके हुए हैं।
Author: THE CG NEWS
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