
दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के च्यवनप्राश विज्ञापन पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह अपने उस विज्ञापन को, जिसमें अन्य ब्रांड्स को ‘धोखा’ कहा गया है, 72 घंटे के भीतर सभी प्लेटफॉर्म्स से हटा ले। अदालत ने साफ कहा कि किसी उत्पाद की तुलना करना अलग बात है, लेकिन दूसरों को नीचा दिखाने वाला या भ्रामक प्रचार कानून के खिलाफ है।
डाबर की शिकायत पर कोर्ट का सख्त रुख
दरअसल, यह मामला डाबर इंडिया लिमिटेड की शिकायत पर आधारित है। डाबर ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि पतंजलि आयुर्वेद ने अपने “स्पेशल च्यवनप्राश” के प्रचार में उनके ब्रांड और पूरे च्यवनप्राश उद्योग को गलत तरीके से ‘धोखा’ बताकर पेश किया है। इस पर जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने 6 नवंबर को अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसे सोमवार को सार्वजनिक रूप से पढ़ा गया। कोर्ट ने कहा कि एक आम उपभोक्ता के दृष्टिकोण से देखने पर यह विज्ञापन यह धारणा देता है कि अन्य ब्रांड्स नकली या भ्रामक हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।
कोर्ट ने पतंजलि को निर्देश दिया है कि वह इस विज्ञापन को नेशनल टीवी चैनल्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, स्ट्रीमिंग सर्विसेज, सोशल मीडिया अकाउंट्स (जैसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स), प्रिंट मीडिया और अन्य किसी भी माध्यम से तुरंत हटाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी भविष्य में ऐसा कोई नया विज्ञापन नहीं चला सकती जो “धोखा” जैसे शब्दों से दूसरे ब्रांड्स या उनके उत्पादों पर सवाल उठाए।
72 घंटे में विज्ञापन हटाने का आदेश
अदालत ने आदेश दिया है कि पतंजलि को 72 घंटे के भीतर संबंधित सभी प्लेटफॉर्म्स से इस विज्ञापन को हटाना या ब्लॉक करना होगा। यह रोक फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, जब मामले की अगली सुनवाई में मेरिट्स पर विस्तृत बहस होगी। इस बीच, पतंजलि को न केवल विज्ञापन रोकने बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि इस कंटेंट का कोई पुनर्प्रसारण या पुनर्प्रकाशन न हो।
कोर्ट ने कहा कि “किसी उत्पाद की तुलना करना प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है, लेकिन ऐसी तुलना भ्रामक या अपमानजनक नहीं होनी चाहिए। यदि विज्ञापन से यह संदेश जाता है कि बाकी सभी उत्पाद ‘धोखा’ हैं, तो यह कानूनन गलत और भ्रामक है।”
विज्ञापन में क्या कहा गया था?
पतंजलि आयुर्वेद का यह विज्ञापन कुछ दिनों पहले लॉन्च किया गया था, जिसमें बाबा रामदेव खुद नजर आ रहे थे। विज्ञापन में “चलो, धोखा खाओ!” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था और यह दावा किया गया था कि “अधिकांश लोग च्यवनप्राश के नाम पर धोखा खा रहे हैं।” कोर्ट के अनुसार, यह संदेश सीधा-सीधा दूसरे ब्रांड्स, विशेष रूप से डाबर के च्यवनप्राश, को “फेक” या “कम गुणवत्ता वाला” दिखाने की कोशिश थी।
डाबर इंडिया ने इसे कॉमर्शियल डिस्पैरेजमेंट (Commercial Disparagement) का मामला बताया — यानी किसी कंपनी द्वारा दूसरे ब्रांड को नीचा दिखाने की कोशिश। डाबर का कहना है कि पतंजलि का यह विज्ञापन न सिर्फ उनके ब्रांड की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं के मन में पूरे च्यवनप्राश वर्ग के प्रति अविश्वास भी पैदा कर रहा है।
पतंजलि बनाम डाबर: पुराना विवाद फिर उभरा
पतंजलि और डाबर के बीच यह टकराव नया नहीं है। इससे पहले भी जुलाई 2025 में डाबर की शिकायत पर कोर्ट ने पतंजलि को अपने एक पुराने विज्ञापन को हटाने का निर्देश दिया था। उस समय पतंजलि ने डाबर के च्यवनप्राश को “साधारण” और “आयुर्वेद की परंपरा से दूर” बताया था।
उस विज्ञापन में स्वामी रामदेव यह कहते नजर आए थे कि “जिन्हें आयुर्वेद और वेदों का ज्ञान नहीं है, वे पारंपरिक च्यवनप्राश कैसे बना सकते हैं?” — कोर्ट ने इसे भी दूसरे ब्रांड की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला वक्तव्य माना था।
बाजार पर असर और आगे की दिशा
च्यवनप्राश बाजार में डाबर लगभग 60% हिस्सेदारी के साथ लंबे समय से अग्रणी है, जबकि पतंजलि हाल के वर्षों में तेजी से अपने उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पतंजलि का उद्देश्य “स्वदेशी और आयुर्वेदिक ब्रांड” के रूप में खुद को अधिक प्रामाणिक दिखाना है, लेकिन ऐसे विज्ञापनों से कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रेटजी विवादों में घिरती जा रही है।
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से आने वाले समय में हेल्थ और एफएमसीजी सेक्टर के ब्रांड्स को विज्ञापन रणनीति में अधिक सतर्क रहना होगा। इस मामले से एक स्पष्ट संदेश गया है कि उपभोक्ता को भ्रमित करने या प्रतिस्पर्धियों को नीचा दिखाने की कोशिशें अब अदालतों में टिक नहीं पाएंगी।
अगली सुनवाई और संभावित परिणाम
अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को होगी। तब दोनों पक्षों के तर्कों को विस्तार से सुना जाएगा और अदालत स्थायी राहत (Permanent Relief) देने या रोक हटाने पर निर्णय लेगी। फिलहाल डाबर को अस्थायी राहत मिली है जबकि पतंजलि अदालत के आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर सकता है।
यह फैसला न केवल डाबर और पतंजलि के बीच की कानूनी लड़ाई को नया मोड़ देता है, बल्कि यह भारतीय विज्ञापन उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर (Benchmark) साबित हो सकता है, जहां अब ब्रांड्स को प्रतिस्पर्धा में भी मर्यादा और सत्यता का पालन करना होगा।
Author: THE CG NEWS
TheCGNews.in – छत्तीसगढ़ की सच्ची आवाज़ “TheCGNews.in” छत्तीसगढ़ का एक उभरता हुआ डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जो प्रदेश की ज़मीन से जुड़ी, वास्तविक और निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुँचाने के मिशन के साथ कार्यरत है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी ताकत है – स्थानीयता और विश्वसनीयता। TheCGNews.in का फोकस सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज पर नहीं, बल्कि उन खबरों पर है जो आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं – गांव, कस्बों, पंचायत, युवाओं, शिक्षा, रोजगार, राजनीति, संस्कृति और जन-समस्याओं की सच्ची झलक यहाँ देखने को मिलती है। TheCGNews.in की खास बातें: • ✅ छत्तीसगढ़ की हर कोने से रिपोर्टिंग • ✅ सिर्फ सनसनी नहीं – समाधान की पत्रकारिता • ✅ युवाओं और किसानों की आवाज़ • ✅ भ्रष्टाचार, विकास और बदलाव की असली रिपोर्ट • ✅ हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में खबरें







