राहुल गांधी का केंद्र पर सवाल—दिल्ली में खतरनाक स्तर का प्रदूषण, बच्चे जहरीली हवा में सांस ले रहे; संसद के शीतकालीन सत्र में व्यापक चर्चा की मांग

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दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की राजधानी में प्रदूषण का स्तर हर दिन खतरनाक होता जा रहा है, लेकिन सरकार की तरफ से न तो कोई ठोस कार्रवाई दिख रही है और न ही कोई जवाबदेही। राहुल ने पूछा—“मोदी जी चुप क्यों हैं? बच्चे जहरीली हवा में बड़े हो रहे हैं, और सरकार सिर्फ देख रही है।”

राहुल गांधी ने X पर दिल्ली की महिलाओं के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे प्रदूषण से जुड़े उनके अनुभव और चिंताओं को सुनते नजर आए। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा कि दिल्ली में हर मां अपने बच्चों की सेहत को लेकर डरी हुई है। उन्होंने कहा कि महिलाएं उन्हें बताती हैं कि छोटे बच्चे दिन-रात प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। राहुल के मुताबिक लोग थके हुए और गुस्से में हैं क्योंकि सरकार की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा।

राहुल ने 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में प्रदूषण पर विस्तार से और गंभीरता से चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि देश हेल्थ इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में तत्काल प्रभाव से लागू किए जा सकने वाले एक सख्त एक्शन प्लान की जरूरत है। राहुल बोले—“हमारे बच्चों को बहाने नहीं, साफ हवा चाहिए। केंद्र सरकार अब भी आंखें बंद किए बैठी है, जबकि समय हाथों से फिसलता जा रहा है।”

दिल्ली में हवा का स्तर ‘खतरनाक’, AQI 545 तक पहुंचा

दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स कई इलाकों में 500 से ऊपर पहुंच चुका है, जो गंभीरतम श्रेणी माना जाता है। 545 का AQI दर्ज होने के साथ दिल्ली का वायु प्रदूषण एक बार फिर हेल्थ इमरजेंसी के स्तर पर पहुंच गया है। राजधानी को ढकने वाली धुंध और सांस लेने में होने वाली दिक्कतें आम होती जा रही हैं।

राहुल द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में महिलाएं प्रदूषण से बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव और लगातार बिगड़ते हालात पर अपनी चिंताएं ज़ाहिर करती नजर आईं। उन्होंने बताया कि बच्चों में खांसी, सांस फूलना, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। इन महिलाओं का कहना है कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

राहुल का दूसरा पोस्ट—“जहरीली हवा से बच्चों में फेफड़ों और दिल की बीमारियां बढ़ रहीं”

एक अन्य पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा कि बच्चों का दर्द सबसे गहरी चोट की तरह मांओं के दिल में उतरता है। उन्होंने कहा कि जहरीली हवा बच्चों के फेफड़ों, दिल और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस भयावह राष्ट्रीय आपदा के बीच भी हाथ पर हाथ रखे बैठी है। उन्होंने कहा कि भारत को तुरंत निर्णायक कदम उठाने होंगे ताकि बच्चे साफ हवा के लिए संघर्ष न करें, बल्कि सुरक्षित वातावरण में बड़े हों।

CJI भी हुए प्रदूषण से प्रभावित

प्रदूषण का असर समाज के हर वर्ग पर दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी हाल ही में बताया कि मंगलवार शाम को वे सिर्फ एक घंटा टहलने निकले थे, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने कहा कि यह समस्या बेहद गंभीर है और इसका हल जल्द से जल्द निकालना जरूरी है।

दिल्ली-NCR में हल्का सुधार, ग्रैप-3 की पाबंदियां हटाई गईं

26 नवंबर को दिल्ली-NCR में AQI में हल्का सुधार दर्ज किया गया, जिसके बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रैप-3 की पाबंदियां हटाने का फैसला लिया। इसके साथ ही आधे कर्मचारियों के लिए लागू वर्क फ्रॉम होम और बीएस-3 तक के चार पहिया वाहनों पर लगी रोक भी खत्म कर दी गई। स्कूलों में चल रही हाइब्रिड मोड क्लासेज भी सामान्य मोड में वापस आ गई हैं।

हालांकि दिल्ली का AQI 327 के आसपास बना हुआ है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है और अब भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रदूषण के मूल कारणों पर सख्त नीति नहीं बनती, तब तक ऐसे अस्थायी सुधारों का ज्यादा असर नहीं होगा।

देश का 60% हिस्सा गंभीर प्रदूषण से जूझ रहा

एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के 749 में से 447 जिलों में प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक है। 19 राज्यों में वार्षिक औसत पीएम 2.5 खतरनाक स्तर तक पहुंचा हुआ है। दिल्ली, असम, हरियाणा, बिहार और पंजाब के कई जिले देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश का कोई भी जिला WHO के सुरक्षित मानक पर नहीं है, जो चिंता का विषय है।

राहुल गांधी के बयान और लगातार बढ़ते आंकड़ों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदूषण अब सिर्फ दिल्ली का नहीं, बल्कि पूरे देश का गंभीर संकट बन चुका है। संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होगी या नहीं, इस पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।

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Author: THE CG NEWS

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