किशोरों में बढ़ती ई-सिगरेट की लत: एक साल तक लगातार इस्तेमाल से बढ़ते हैं गंभीर स्वास्थ्य जोखिम, डॉक्टरों ने जताई चिंता

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देशभर में किशोरों और युवाओं के बीच ई-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। आकर्षक फ्लेवर, स्टाइलिश डिजाइन और “कम नुकसानदेह” होने के दावे के चलते बड़ी संख्या में किशोर इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। हालांकि मेडिकल एक्सपर्ट्स और डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि ई-सिगरेट को सुरक्षित समझना एक बड़ी भूल है। अगर कोई किशोर या युवा एक साल तक लगातार ई-सिगरेट का सेवन करता है, तो उसके शरीर पर इसके गंभीर और लंबे समय तक असर पड़ सकते हैं।

ई-सिगरेट को लेकर गलतफहमी और बढ़ता चलन

डॉक्टरों के अनुसार, ई-सिगरेट को अक्सर पारंपरिक सिगरेट का सुरक्षित विकल्प बताकर प्रचारित किया जाता है, लेकिन इसमें मौजूद निकोटीन और केमिकल्स शरीर को चुपचाप नुकसान पहुंचाते हैं। किशोरों का दिमाग अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, ऐसे में निकोटीन की लत उनके मानसिक और शारीरिक विकास को सीधे प्रभावित करती है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले कई छात्र इसे फैशन या तनाव दूर करने का आसान तरीका मानकर शुरू करते हैं और धीरे-धीरे इसकी लत लग जाती है।

एक साल तक ई-सिगरेट पीने से बढ़ते हैं ये स्वास्थ्य जोखिम

चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक ई-सिगरेट का इस्तेमाल करने से सबसे पहला असर फेफड़ों पर पड़ता है। सांस फूलना, लगातार खांसी और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके अलावा निकोटीन दिल की धड़कन को असामान्य कर सकता है, जिससे भविष्य में हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। दिमाग पर पड़ने वाले असर भी कम खतरनाक नहीं हैं। याददाश्त कमजोर होना, एकाग्रता में कमी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण अक्सर देखे जा रहे हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि ई-सिगरेट में मौजूद केमिकल्स हार्मोनल संतुलन को भी बिगाड़ सकते हैं, जिससे किशोरों में थकान, नींद की समस्या और मूड स्विंग बढ़ जाते हैं। इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण बार-बार संक्रमण होने की आशंका रहती है। लंबे समय तक उपयोग से मुंह और गले में सूजन, मसूड़ों की बीमारी और दांतों को नुकसान भी देखा गया है। कुछ मामलों में पेट से जुड़ी दिक्कतें, मतली और भूख कम लगने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर

विशेषज्ञों के अनुसार ई-सिगरेट की लत केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। लगातार निकोटीन लेने से एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षण बढ़ सकते हैं। किशोरों में आत्मविश्वास की कमी, पढ़ाई में गिरावट और सामाजिक व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि जो किशोर ई-सिगरेट की लत में फंसते हैं, उनमें आगे चलकर सिगरेट या अन्य नशे की चीजों की ओर जाने का खतरा भी अधिक रहता है।

डॉक्टरों की सलाह: लत से कैसे उबरें

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ई-सिगरेट की लत से बाहर निकलना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। सबसे पहले परिवार और स्कूल स्तर पर जागरूकता जरूरी है, ताकि किशोर यह समझ सकें कि ई-सिगरेट कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर लत लग चुकी है, तो इसे अचानक छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे कम करना बेहतर होता है। काउंसलिंग और बिहेवियर थेरेपी से भी काफी मदद मिलती है।

फिजिकल एक्टिविटी, योग और ध्यान जैसे उपाय निकोटीन की तलब को कम करने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही, मोबाइल और सोशल मीडिया पर दिखने वाले भ्रामक विज्ञापनों से दूरी बनाना भी जरूरी है। गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह से निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी या अन्य मेडिकल सपोर्ट लिया जा सकता है।

समय रहते चेतना जरूरी

डॉक्टरों का साफ कहना है कि अगर किशोर अवस्था में ई-सिगरेट की लत को नहीं रोका गया, तो इसके परिणाम लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं। माता-पिता, शिक्षक और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे किशोरों को सही जानकारी दें और उन्हें इस खतरनाक लत से दूर रखें। ई-सिगरेट को ट्रेंड नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में देखने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखा जा सके।

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Author: THE CG NEWS

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