ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज: हार की स्थिति में अरबों डॉलर लौटाने का खतरा, बोले ट्रम्प—अमेरिका बर्बाद हो जाएगा

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ की वैधता पर बड़ा फैसला सुनाने वाली है। भारतीय समयानुसार यह फैसला आज रात करीब 8:30 बजे तक आ सकता है। इस फैसले पर न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। खुद ट्रम्प ने इसे अमेरिका की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए चिंता जाहिर की है। ट्रम्प का कहना है कि अगर कोर्ट ने उनके टैरिफ को रद्द कर दिया, तो अमेरिका को टैरिफ से जुटाए गए अरबों डॉलर कंपनियों को लौटाने पड़ सकते हैं और इसके गंभीर आर्थिक नतीजे होंगे।

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लगाया गया था टैरिफ

अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आयात होने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। टैरिफ का उद्देश्य विदेशी सामान को महंगा बनाकर अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देना और आयात पर निर्भरता कम करना बताया गया। ट्रम्प का दावा है कि इन टैरिफ्स से अमेरिका को 600 अरब डॉलर से ज्यादा का राजस्व मिला, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उनका तर्क है कि व्यापार घाटा और विदेशी निर्भरता भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, इसलिए यह कदम पूरी तरह जायज है।

49 साल पुराने कानून के दायरे में विवाद

इस पूरे मामले की जड़ 1977 में बना इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA है। यह कानून राष्ट्रपति को असाधारण अंतरराष्ट्रीय या विदेशी आर्थिक संकट की स्थिति में विशेष शक्तियां देता है। इसके तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक, संपत्तियां फ्रीज करने और आर्थिक प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले ले सकता है। ट्रम्प ने इसी कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लागू किए। अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि क्या IEEPA के तहत राष्ट्रपति को इतने व्यापक और लंबे समय तक चलने वाले टैरिफ लगाने का अधिकार है या इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी है।

राष्ट्रपति की शक्ति की सीमा तय करेगा फैसला

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राष्ट्रपति की आपातकालीन आर्थिक शक्तियों की सीमा भी तय करेगा। अगर कोर्ट ट्रम्प के खिलाफ फैसला देती है, तो न सिर्फ मौजूदा टैरिफ रद्द हो सकते हैं, बल्कि भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति की आर्थिक आपातकालीन शक्तियां सीमित हो जाएंगी। वहीं अगर कोर्ट ट्रम्प के पक्ष में जाती है, तो इसका मतलब होगा कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर कांग्रेस की मंजूरी के बिना भी वैश्विक व्यापार से जुड़े बड़े फैसले ले सकता है।

निचली अदालतों से मिल चुका है झटका

इससे पहले निचली अदालतों ने ट्रम्प के टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया था। कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट का मानना था कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लंबी मौखिक बहस सुनी थी, जहां जजों ने ट्रम्प सरकार के तर्कों पर सवाल उठाए थे। जजों ने यह भी कहा था कि टैरिफ टैक्स की श्रेणी में आते हैं और टैक्स लगाने का अधिकार आमतौर पर संसद के पास होता है।

12 राज्यों ने किया है मुकदमा

ट्रम्प के टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के 12 राज्यों और कई छोटे कारोबारियों ने मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि राष्ट्रपति ने अपनी संवैधानिक सीमाओं से बाहर जाकर आयात शुल्क लगाए हैं, जिससे छोटे व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है। राज्यों का तर्क है कि IEEPA का इस्तेमाल व्यापार नीति बदलने के लिए नहीं किया जा सकता।

फैसले के वैश्विक असर

अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रम्प के खिलाफ आता है, तो टैरिफ हट सकते हैं, कंपनियों को रिफंड मिल सकता है और वैश्विक व्यापार में राहत देखने को मिल सकती है। इससे भारत, चीन और यूरोप जैसे देशों के निर्यातकों को फायदा होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आ सकती है। वहीं ट्रम्प के पक्ष में फैसला आने पर टैरिफ जारी रहेंगे, जिससे देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है और जवाबी टैरिफ का सिलसिला तेज हो सकता है।

भारत पर 50% टैरिफ भी चर्चा में

इस मामले का असर भारत पर भी पड़ रहा है। अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% अतिरिक्त टैरिफ रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया। भारत इन टैरिफ को घटाने के लिए अमेरिका से बातचीत कर रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की दिशा भी तय कर सकता है।

कुल मिलाकर, आज आने वाला यह फैसला न सिर्फ ट्रम्प की नीतियों, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ताकत और वैश्विक व्यापार व्यवस्था के भविष्य के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।

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Author: THE CG NEWS

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