
महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में गुरुवार को मतदान प्रक्रिया पूरी हो गई। मतदान समाप्त होने के बाद आए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के तीन प्रमुख एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा-शिंदे गठबंधन को 130 से 150 सीटें मिल सकती हैं, जबकि बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 सीटों का है।
एग्जिट पोल में यह भी संकेत दिया गया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस गठबंधन को कुल मिलाकर करीब 60 सीटें मिल सकती हैं। वहीं अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 5 से 7 सीटें जाने का अनुमान है। बीएमसी सहित सभी नगर निगमों के नतीजे शुक्रवार को घोषित किए जाएंगे।
करीब 50 फीसदी रहा मतदान
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक सभी नगर निगमों में शाम 5:30 बजे मतदान समाप्त हुआ। राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे ने बताया कि शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब 50 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है। हालांकि अंतिम और आधिकारिक मतदान प्रतिशत बाद में जारी किया जाएगा। मुंबई जैसे महानगर में मध्यम स्तर का मतदान राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत माना जा रहा है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर मतदान प्रतिशत कम रहने की प्रवृत्ति रही है।
चार साल देरी से हुए नगर निगम चुनाव
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों में इस बार करीब चार साल की देरी हुई। बीएमसी का पिछला चुनाव साल 2017 में हुआ था और नियमानुसार अगला चुनाव 2022 में होना था। लेकिन उस समय वार्ड सीमाओं के पुनर्निर्धारण और निर्वाचन प्रक्रिया में बदलाव को लेकर विवाद और कानूनी प्रक्रियाएं चल रही थीं।
बीएमसी में वार्डों की संख्या 227 से बढ़ाकर 236 करने का प्रस्ताव सामने आया था। इसके लिए नए वार्ड नक्शे और सीटों का पुनर्विन्यास किया जा रहा था। चूंकि नए परिसीमन को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो पाया, इसलिए पुरानी वार्ड संरचना पर चुनाव कराना संभव नहीं माना गया और चुनाव टाल दिए गए। अंततः वार्डों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव पास नहीं हो सका, जिसके बाद मौजूदा 227 सीटों पर चुनाव कराए गए।
बीएमसी चुनाव में कड़ा राजनीतिक मुकाबला
बीएमसी चुनाव में इस बार राजनीतिक समीकरण काफी जटिल रहे। कुल 227 सीटों पर चुनाव हुए। भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने गठबंधन में चुनाव लड़ा। सीटों के बंटवारे के तहत भाजपा ने 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा।
दूसरी ओर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ गठबंधन किया। इस गठबंधन के तहत शिवसेना यूबीटी ने 163 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए, जबकि एमएनएस को 52 सीटें दी गईं। इस गठबंधन को मुंबई की मराठी राजनीति में अहम माना जा रहा था।
कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ चुनावी समझौता किया। कांग्रेस ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि वीबीए को 46 सीटें दी गईं। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं किया। अजित पवार गुट की एनसीपी ने 94 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे।
एग्जिट पोल के मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं तो यह मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा। लंबे समय तक बीएमसी पर शिवसेना का दबदबा रहा है, लेकिन भाजपा-शिंदे गठबंधन को बहुमत मिलने से सत्ता संतुलन बदल सकता है। यह नतीजा न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि राज्य स्तर की सियासत पर भी असर डाल सकता है।
हालांकि जानकार यह भी कहते हैं कि एग्जिट पोल अंतिम नतीजे नहीं होते और असली तस्वीर परिणाम घोषित होने के बाद ही साफ होगी। मुंबई जैसे शहर में जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और वार्ड स्तर की राजनीति कई बार एग्जिट पोल के अनुमानों को पलट भी देती है।
अब सबकी नजरें शुक्रवार को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि देश की सबसे अमीर नगर निकाय कही जाने वाली बीएमसी की सत्ता किसके हाथ जाएगी और मुंबई की राजनीति में अगला अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
Author: THE CG NEWS
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