UGC के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध तेज: यूपी में सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, सरकार ने भेदभाव से किया इनकार

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यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। जनरल कैटेगरी के छात्र और सवर्ण समाज से जुड़े संगठन इन नियमों को अपने खिलाफ बताते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। नई दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रदर्शनकारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं और यह मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

UP के कई जिलों में प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने नए नियमों के विरोध में प्रदर्शन किए। रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भेजीं। उनका कहना है कि यदि जनरल कैटेगरी के छात्रों के हितों की रक्षा नहीं की गई, तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इस्तीफा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

विरोध के बीच उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। वहीं कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक कविता पोस्ट कर नियमों पर तंज कसा, जो तेजी से वायरल हो गई। उनके पोस्ट को विरोध करने वाले वर्ग की भावनाओं की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार का पक्ष: भेदभाव नहीं होगा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल करने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी वर्ग के खिलाफ भेदभाव करना नहीं है और न ही किसी के साथ अत्याचार होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, नियमों का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

UGC के नए नियमों को चुनौती देते हुए विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में नियमों पर तत्काल रोक लगाने, सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और इक्विटी से जुड़ी सुविधाएं सभी वर्गों के लिए उपलब्ध कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि नियमों की मौजूदा संरचना से जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ असमान व्यवहार की आशंका पैदा होती है।

क्या हैं UGC के नए नियम

UGC ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ को अधिसूचित किया था। इन नियमों के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियों, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमों के गठन का प्रावधान किया गया है। इन टीमों को विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से जुड़ी शिकायतों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

विरोध की वजह और आरोप

नियमों के विरोध में खड़े संगठनों और छात्रों का कहना है कि इससे सवर्ण और जनरल कैटेगरी के छात्रों को ‘स्वाभाविक अपराधी’ के रूप में देखा जाएगा। उनका आरोप है कि कैंपस में शिकायतों की प्रक्रिया एकतरफा हो सकती है, जिससे जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ पूर्वाग्रह बढ़ेगा। उनका यह भी कहना है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में तनाव और अराजकता की स्थिति बन सकती है।

सरकार और आलोचकों के बीच टकराव

जहां सरकार इन नियमों को सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में कदम बता रही है, वहीं आलोचक इसे भेदभावपूर्ण और असंतुलित करार दे रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते टकराव ने इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार के अगले कदम इस विवाद की दिशा तय करेंगे।

निष्कर्ष

UGC के नए नियमों को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। एक ओर सरकार सामाजिक समरसता और समानता की बात कर रही है, तो दूसरी ओर विरोध करने वाले वर्ग इसे अपने अधिकारों पर खतरा मान रहे हैं। इस टकराव का समाधान किस दिशा में जाएगा, इस पर देशभर की निगाहें टिकी हैं।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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