
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने तीसरे दिन और गंभीर रूप ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में बयान देते हुए कहा कि ईरान के साथ यह जंग 4 से 5 हफ्तों तक चल सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास इससे कहीं अधिक समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रखने की क्षमता है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना फिलहाल बड़े स्तर पर ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अभी तक पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
‘सबसे बड़ा हमला अभी बाकी’
सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने अभी तक ईरान पर अपनी पूरी सैन्य क्षमता के साथ हमला शुरू नहीं किया है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि “सबसे बड़ा हमला अभी बाकी है।” ट्रम्प ने दोहराया कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बड़ी और आधुनिक सेना है और जरूरत पड़ने पर उसका पूरी तरह उपयोग किया जाएगा। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज हो सकता है।
ईरान का जवाबी हमला, अमेरिकी ठिकानों को निशाना
जंग के तीसरे दिन सोमवार को ईरान ने मिडिल ईस्ट के चार देशों में स्थित छह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, इन हमलों के बाद कुवैत में अमेरिका के तीन फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कुवैती सुरक्षा बलों ने इन विमानों को दुश्मन का समझकर निशाना बनाया, जिसके कारण हादसा हुआ। अमेरिका ने बताया कि सभी पायलट सुरक्षित हैं। हालांकि इस घटना ने सहयोगी देशों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अब तक ईरानी हमलों में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। वहीं, ईरान की ओर से भी बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं।
ईरान में भारी तबाही, सैकड़ों मौतें
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के एक हजार से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। शुरुआती 30 घंटों में दो हजार से ज्यादा बम गिराए जाने की बात कही जा रही है। अब तक ईरान में 555 लोगों की मौत और 740 से अधिक के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल बनी हुई है।
इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। पहले दिन हुई बमबारी में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबर ने हालात को और विस्फोटक बना दिया। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई जारी है।
बातचीत से इनकार, कूटनीतिक रास्ता बंद?
ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने बैक-चैनल के जरिए वार्ता की कोशिश की है। लारीजानी ने कहा कि जब तक अमेरिका और इजराइल हमले बंद नहीं करते, तब तक किसी भी प्रकार की बातचीत संभव नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते फिलहाल लगभग बंद हो चुके हैं। यदि यह स्थिति लंबी खिंचती है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है। हालांकि जमीन पर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ट्रम्प के हालिया बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहीं ईरान भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
आने वाले सप्ताह निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई का दायरा और बढ़ता है, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
Author: THE CG NEWS
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