ईरान-इजराइल जंग का असर: अमेरिकी बाजार 1200 अंक लुढ़का, डाउ जोन्स 47,788 पर बंद; कच्चे तेल की तेजी से निवेशकों में घबराहट

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मध्य-पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई, जहां डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 1200 अंक टूटकर 47,788 के स्तर पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल और क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है।

बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। टेक, बैंकिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की मांग बढ़ी और सोने की कीमतों में भी मजबूती देखी गई।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर बाजार में चिंता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है, जिससे निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में सीमित मजबूती देखी गई, लेकिन व्यापक बाजार में गिरावट का दबाव बना रहा। निवेशकों को डर है कि तेल महंगा होने से परिवहन, विनिर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं की लागत बढ़ेगी, जिसका असर कॉर्पोरेट मुनाफे पर पड़ेगा।

निवेशकों में अनिश्चितता

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव के दौरान निवेशक आमतौर पर जोखिम से बचते हैं। डाउ जोन्स के अलावा एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। टेक्नोलॉजी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली रही।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष सीमित रहता है तो बाजार धीरे-धीरे स्थिर हो सकता है, लेकिन यदि इसमें अन्य क्षेत्रीय शक्तियां शामिल होती हैं तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि बढ़ती ऊर्जा कीमतें महंगाई को ऊपर ले जा सकती हैं।

सोने और सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव

बाजार में अस्थिरता के बीच निवेशकों ने सोने और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया। सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जो वैश्विक अनिश्चितता के समय आम प्रवृत्ति मानी जाती है। डॉलर में भी मजबूती देखने को मिली, जिससे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।

वैश्विक बाजारों पर प्रभाव

अमेरिकी बाजार की गिरावट का असर एशियाई और यूरोपीय बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। वैश्विक निवेशक फिलहाल घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि मध्य-पूर्व में हालात और बिगड़ते हैं तो ऊर्जा कीमतों में और उछाल संभव है, जिससे दुनिया भर में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक अस्थिरता के बावजूद दीर्घकाल में बाजार मूलभूत आर्थिक कारकों पर आधारित रहेंगे। फिलहाल निवेशकों को सतर्कता और विविधीकरण की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

ईरान-इजराइल जंग के बीच अमेरिकी बाजार में आई यह गिरावट दर्शाती है कि भू-राजनीतिक घटनाएं वैश्विक वित्तीय प्रणाली को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

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Author: THE CG NEWS

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