घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपए महंगा: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच गैस किल्लत की आशंका, सरकार ने बढ़ाया उत्पादन

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केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। अब 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं को 60 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में यह सिलेंडर अब 913 रुपए में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपए थी। इसके अलावा 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपए का इजाफा किया गया है, जिसके बाद इसकी कीमत 1883 रुपए हो गई है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।

सरकार द्वारा यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

लगभग एक साल बाद बढ़े घरेलू सिलेंडर के दाम

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में पिछली बार 8 अप्रैल 2025 को बढ़ोतरी की गई थी, जब सरकार ने 50 रुपए का इजाफा किया था। करीब एक साल बाद फिर से कीमतों में वृद्धि की गई है। वहीं कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में 1 मार्च 2026 को भी 31 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई थी।

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण यह कदम उठाया गया है।

गैस की किल्लत रोकने के लिए उत्पादन बढ़ाने का आदेश

संभावित सप्लाई संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 5 मार्च को देश की सभी तेल रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया था। सरकार ने इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश जारी किया है।

निर्देशों के अनुसार अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का उपयोग प्राथमिक रूप से रसोई गैस यानी LPG के उत्पादन के लिए करेंगी। इसके अलावा सभी कंपनियों को इन गैसों की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को देने के लिए कहा गया है।

इन सरकारी कंपनियों में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए।

सप्लाई संकट की दो बड़ी वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा संकट के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का असुरक्षित होना है। यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह मार्ग फिलहाल सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। कई तेल टैंकर इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत LNG इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।

दूसरा कारण कतर के LNG प्लांट पर प्रभाव है। हाल ही में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में कई ऊर्जा ठिकानों पर हमले की खबरें सामने आईं। इसके बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले प्रमुख देश कतर ने अपने LNG प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है।

भारत अपनी कुल LNG जरूरत का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है। ऐसे में वहां उत्पादन रुकने से गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।

CNG कंपनियों ने भी जताई चिंता

गैस सप्लाई की स्थिति को देखते हुए ‘एसोसिएशन ऑफ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटीज’ ने सरकारी कंपनी गेल को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि यदि कतर से मिलने वाली सस्ती गैस की सप्लाई कम होती है, तो उन्हें स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ेगी।

स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत फिलहाल लगभग 25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट के तहत मिलने वाली गैस की तुलना में काफी ज्यादा है। कंपनियों को चिंता है कि अगर CNG की कीमतें बढ़ती हैं तो उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से शिफ्ट हो सकते हैं।

निजी कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

सरकार के इस फैसले का असर निजी क्षेत्र की कंपनियों पर भी पड़ सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादन के बजाय LPG बनाने में इस्तेमाल करने से अल्काइलेट्स और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे उत्पादों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमत LPG की तुलना में अधिक होती है, इसलिए कंपनियों के मुनाफे पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सरकार का दावा: पर्याप्त भंडार मौजूद

हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों के अनुसार देश के पास पेट्रोलियम और LPG का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

इसके अलावा भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से भी आयात कर रहा है, जिससे होर्मुज मार्ग पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है। सरकार का कहना है कि इन उपायों से देश में गैस और ईंधन की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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Author: THE CG NEWS

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