
हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह दिन मां शीतला की पूजा के लिए समर्पित होता है, जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। देश के कई हिस्सों में इस दिन भक्त माता शीतला की पूजा-अर्चना कर परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला की विधि-विधान से पूजा करने और उनके मंत्रों का जाप करने से जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं।
कब है शीतला अष्टमी 2026
पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी 2026 में 11 मार्च (बुधवार) को मनाई जाएगी। यह पर्व आमतौर पर होली के आठवें दिन मनाया जाता है। कई राज्यों में इसे बसोड़ा या बसोरा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खास बात यह होती है कि माता को एक दिन पहले बनाया गया ठंडा भोजन अर्पित किया जाता है। इसलिए होली के बाद के दिन घरों में प्रसाद के रूप में ठंडे पकवान बनाए जाते हैं।
शीतला माता का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शीतला को देवी दुर्गा का ही एक रूप माना जाता है। उन्हें विशेष रूप से रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। प्राचीन समय में जब चेचक और अन्य संक्रामक बीमारियां अधिक फैलती थीं, तब लोग माता शीतला की पूजा कर स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करते थे।
आज भी यह पर्व लोगों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है। इस दिन माता की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।
शीतला अष्टमी की पूजा विधि
शीतला अष्टमी के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनकर माता की पूजा करते हैं। घर या मंदिर में मां शीतला की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर उन्हें ठंडा भोजन, फल और मिठाई अर्पित की जाती है।
मान्यता है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना भोजन ही माता को भोग लगाया जाता है। इसके बाद भक्त दीपक जलाकर माता के मंत्रों का जाप करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
मां शीतला के 5 दिव्य मंत्र
शीतला अष्टमी के दिन इन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
1. ॐ शीतलायै नमः
यह मां शीतला का मूल मंत्र माना जाता है। इसका जाप करने से रोगों से रक्षा की मान्यता है।
2. ॐ ह्रीं शीतलायै नमः
यह मंत्र मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए जपा जाता है।
3. शीतले शीतले चेति यो ब्रूयाद् दाहपीड़ितः।
विस्फोटकभयं घोरं क्षिप्रं तस्य प्रणश्यति॥
यह शीतला माता का प्रसिद्ध स्तोत्र है, जिसके जाप से रोगों से मुक्ति की कामना की जाती है।
4. वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनी कलशोपेतां शूर्पालंकृत मस्तकाम्॥
इस मंत्र में मां शीतला के स्वरूप का वर्णन किया गया है।
5. ॐ श्री शीतलायै नमः
इस मंत्र का जाप सुख, शांति और समृद्धि के लिए किया जाता है।
ठंडा भोजन चढ़ाने की परंपरा
शीतला अष्टमी के दिन माता को ठंडा भोजन चढ़ाने की परंपरा काफी प्राचीन है। कई स्थानों पर लोग पूड़ी, दही, कढ़ी, मीठा चावल और अन्य पकवान एक दिन पहले बनाकर माता को अर्पित करते हैं। इसे प्रसाद के रूप में परिवार और रिश्तेदारों में भी बांटा जाता है।
देश के कई राज्यों में मनाया जाता है पर्व
शीतला अष्टमी का पर्व राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा समेत कई राज्यों में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
भक्त सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
आस्था और स्वास्थ्य का संदेश
शीतला अष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता का भी संदेश देती है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में स्वास्थ्य सबसे बड़ी संपत्ति है।
मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ मां शीतला की पूजा करने और उनके मंत्रों का जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और कई परेशानियां दूर हो सकती हैं।
Author: THE CG NEWS
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