ईरान में 15 दिन बाद भी सत्ता बरकरार: जंग के बीच तेहरान के पास अभी भी पलटवार की क्षमता, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

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ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष को लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। युद्ध के बावजूद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है और तेहरान की मौजूदा सरकार पहले की तरह कायम है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अमेरिका सैन्य कार्रवाई में बढ़त का दावा कर रहा हो, लेकिन ईरान के पास अब भी हालात को पलटने की क्षमता मौजूद है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगा कि यह संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो गया है।

युद्ध के बावजूद ट्रम्प के बड़े राजनीतिक लक्ष्य अधूरे

अमेरिकी प्रशासन की ओर से युद्ध में बढ़त का दावा किया जा रहा है और माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जल्द ही जीत का ऐलान कर सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस युद्ध में ईरान की नौसेना को भारी नुकसान हुआ है, उसकी कई मिसाइलें नष्ट कर दी गई हैं और उसके कुछ प्रमुख सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं।

हालांकि इन घटनाओं के बावजूद अमेरिका के वे प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं जिनका जिक्र अमेरिकी नेतृत्व लगातार करता रहा है। सबसे अहम बात यह है कि ईरान में अभी भी पुराना शासन कायम है और वहां सत्ता परिवर्तन की कोई स्थिति दिखाई नहीं दे रही है।

इसके अलावा ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल आपूर्ति को प्रभावित कर वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है।

अमेरिका के भीतर भी दिखने लगा जंग का असर

इस युद्ध का असर अब अमेरिका के भीतर भी महसूस किया जाने लगा है। पेट्रोल की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इसके अलावा किसानों के लिए खाद और अन्य कृषि सामग्री भी महंगी हो गई है।

युद्ध में अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा भी बढ़कर 13 तक पहुंच चुका है, जिससे घरेलू राजनीति में भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका में इस साल नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं और ट्रम्प की अपनी ही पार्टी के कुछ नेता अब उनसे युद्ध समाप्त कर आर्थिक मुद्दों पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं।

तेल बाजार और होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा

इस पूरे संघर्ष में होर्मुज स्ट्रेट सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र बनकर सामने आया है। यह लगभग 21 मील चौड़ा समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यहीं से सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचता है।

ईरान ने संकेत दिया है कि वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकता है। इसी वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समुद्री मार्ग बाधित होता है तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

अमेरिका के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अगर वह अकेले युद्ध रोकने का फैसला करता है तो भी यह निश्चित नहीं है कि तेल की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई चिंताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के बाद ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में तेहरान परमाणु हथियार कार्यक्रम को तेज करने का फैसला भी ले सकता है।

रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास अभी भी करीब 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है। यह सामग्री परमाणु हथियार बनाने के लिए अहम मानी जाती है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि हालिया हमलों के बाद ईरान अपने इन भंडारों तक आसानी से पहुंच सकता है या नहीं।

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी हमलों के बाद परमाणु ठिकानों पर भारी मलबा जमा हो गया है, जिससे इन भंडारों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसके बावजूद विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरानी वैज्ञानिक भविष्य में इन संसाधनों का इस्तेमाल किसी परमाणु या रेडियोएक्टिव हथियार के विकास के लिए कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार जंग से हालात और जटिल

मिडिल ईस्ट से जुड़े मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस संघर्ष ने क्षेत्र की स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। लंबे समय से ईरान अमेरिका के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती रहा है।

अमेरिका के कई राष्ट्रपति ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चिंता जताते रहे हैं। वर्ष 2015 में अमेरिका और अन्य देशों ने ईरान के साथ एक परमाणु समझौता किया था, जिसके तहत तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे।

हालांकि बाद में इस समझौते को खत्म कर दिया गया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा युद्ध ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और अधिक अनिश्चित बना दिया है और आने वाले समय में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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Author: THE CG NEWS

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