
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 19 मार्च को जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जिसने पिछले 22 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। सेंसेक्स 2497 अंक यानी 3.26% गिरकर 74,207 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 776 अंक टूटकर 23,002 के नीचे आ गया। बाजार में यह गिरावट इतनी व्यापक रही कि सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए, जो निवेशकों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली
आज की गिरावट में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने अनिश्चित वैश्विक हालात के चलते इन सेक्टर्स में भारी बिकवाली की। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जियोपॉलिटिकल तनाव और युद्ध जैसी स्थिति में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफा घटता है। ऐसे में निवेशक जोखिम कम करने के लिए शेयर बेचकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं।
गिरावट की तीन बड़ी वजहें
इस बड़ी गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जो 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तीसरा कारण अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई गिरावट का असर भारतीय बाजार पर पड़ना रहा।
HDFC बैंक में हलचल, शेयर में 5% गिरावट
इस गिरावट के बीच HDFC Bank के शेयर में भी करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। उन्होंने अपने इस्तीफे में बैंक के आंतरिक कामकाज को लेकर चिंता जताई थी। उनके स्थान पर केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है, जिन्हें रिजर्व बैंक की मंजूरी भी मिल चुकी है।
एक दिन में 9 लाख करोड़ रुपए की वेल्थ साफ
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा है। BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 439 लाख करोड़ रुपए से घटकर 430 लाख करोड़ रुपए रह गया। यानी केवल एक दिन में निवेशकों की लगभग 9 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति साफ हो गई।
ग्लोबल बाजारों में भी गिरावट का माहौल
भारतीय बाजार पर वैश्विक बाजारों की कमजोरी का भी असर पड़ा है। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट सभी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी 18 मार्च को गिरावट दर्ज की गई, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस गिरावट का बड़ा कारण बनी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। फारस की खाड़ी में सप्लाई बाधित होने के कारण यह उछाल आया है। वहीं भारत का इंडियन बास्केट भी 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका और गहरा गई है।
तेल के तीन बड़े बेंचमार्क और भारत की स्थिति
दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें मुख्य रूप से ब्रेंट, WTI और OPEC बास्केट के आधार पर तय होती हैं। ब्रेंट क्रूड यूरोप के उत्तरी सागर से निकलता है और वैश्विक बाजार का प्रमुख मानक है। WTI अमेरिका का मानक है, जबकि OPEC बास्केट खाड़ी देशों के तेल का मिश्रण है। भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदता है, जिसका औसत ‘इंडियन बास्केट’ कहलाता है।
आगे की राह पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि जियोपॉलिटिकल तनाव कम होता है और सप्लाई चेन सामान्य होती है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
Author: THE CG NEWS
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