
देश में ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए एक और झटका सामने आया है। Swiggy ने 24 मार्च से अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे अब हर ऑर्डर पर ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक भुगतान करना होगा। इस फैसले के बाद ऑनलाइन खाना मंगवाना पहले से और महंगा हो गया है, खासकर उन लोगों के लिए जो नियमित रूप से इन सेवाओं का उपयोग करते हैं।
कंपनी के नए बदलाव के अनुसार, अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय 17.58 रुपए (GST सहित) प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। यानी प्रति ऑर्डर करीब 3.58 रुपए का अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि यह बढ़ोतरी डिलीवरी और ऑपरेशंस की बढ़ती लागत को देखते हुए की गई है।
लगातार बढ़ रही प्लेटफॉर्म फीस
दिलचस्प बात यह है कि Swiggy ने पिछले सात महीनों में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। अगस्त 2025 में कंपनी ने इसे 12 रुपए से बढ़ाकर 14 रुपए किया था और अब मार्च 2026 में इसे बढ़ाकर 17.58 रुपए कर दिया गया है।
दरअसल, कंपनी ने अप्रैल 2023 में पहली बार प्लेटफॉर्म फीस लागू की थी, जो उस समय मात्र 2 रुपए थी। इसके बाद समय-समय पर इसमें बढ़ोतरी होती रही। जनवरी 2024 में यह 5 रुपए, जुलाई 2024 में 6 रुपए, अक्टूबर 2024 में 10 रुपए और फिर अगस्त 2025 में 12 रुपए तक पहुंच गई। इस तरह लगभग तीन वर्षों में प्लेटफॉर्म फीस में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
Zomato के बराबर पहुंची फीस
इस बढ़ोतरी के साथ ही अब Swiggy की प्लेटफॉर्म फीस Zomato के बराबर हो गई है। इससे पहले 20 मार्च को Zomato ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस में करीब 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 14.90 रुपए (बिना GST) कर दिया था। टैक्स जोड़ने के बाद दोनों कंपनियों की प्रभावी फीस लगभग 17.58 रुपए के आसपास पहुंच चुकी है।
इसका मतलब यह है कि अब ग्राहक चाहे किसी भी प्लेटफॉर्म से खाना ऑर्डर करें, उन्हें लगभग समान अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इससे ग्राहकों के पास सस्ता विकल्प चुनने की गुंजाइश भी कम हो गई है।
क्या होती है प्लेटफॉर्म फीस?
प्लेटफॉर्म फीस एक निश्चित शुल्क होता है, जो ग्राहक को हर ऑर्डर पर देना होता है। यह शुल्क खाने की कीमत, रेस्टोरेंट चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग होता है। चाहे ऑर्डर 200 रुपए का हो या 2000 रुपए का, यह फीस हर ऑर्डर पर समान रहती है।
कंपनियां इस फीस का इस्तेमाल अपने ऑपरेटिंग खर्च, टेक्नोलॉजी मेंटेनेंस, सर्वर लागत और कस्टमर सपोर्ट जैसी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करती हैं। इसके अलावा यह उनके यूनिट इकोनॉमिक्स को सुधारने और घाटे को कम करने में भी मदद करता है।
ग्राहकों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
देशभर में लाखों लोग रोजाना Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में प्रति ऑर्डर 2-3 रुपए की बढ़ोतरी भले ही छोटी लगे, लेकिन बड़े स्तर पर यह ग्राहकों की जेब पर असर डालती है।
नियमित रूप से खाना ऑर्डर करने वाले उपभोक्ताओं को हर महीने अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, कंपनियों के लिए यह बढ़ोतरी करोड़ों रुपए का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करती है, जिससे वे अपने नुकसान को कम कर सकें और मुनाफे की दिशा में आगे बढ़ सकें।
नाराजगी और बाजार की रणनीति
बार-बार बढ़ती फीस को लेकर ग्राहकों के बीच नाराजगी भी देखने को मिल रही है। कई यूजर्स का मानना है कि पहले से ही डिलीवरी चार्ज, रेस्टोरेंट कीमत और टैक्स के साथ प्लेटफॉर्म फीस का बोझ बढ़ता जा रहा है।
हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि फूड डिलीवरी कंपनियां अब अपने बिजनेस मॉडल को टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। लगातार घाटे के बाद अब ये कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए प्लेटफॉर्म फीस जैसे स्रोतों पर अधिक निर्भर हो रही हैं।
कुल मिलाकर, ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेक्टर में बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धा के बीच ग्राहकों को अब ज्यादा कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना होगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां अपने यूजर्स को बनाए रखने के लिए किस तरह के नए ऑफर या रणनीतियां अपनाती हैं।
Author: THE CG NEWS
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