PIL खत्म करने की वकालत: सबरीमाला सुनवाई में केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान, अदालत बोली- हम सतर्क

SHARE:

केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाओं (PIL) को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। केंद्र ने अपनी लिखित दलीलों में कहा कि जनहित याचिका की अवधारणा अब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है और इसे न केवल स्पष्ट रूप से परिभाषित करने, बल्कि पूरी तरह खत्म करने पर भी विचार होना चाहिए। इस बयान ने न्यायिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

बदलते समय में PIL की उपयोगिता पर सवाल

केंद्र सरकार का कहना है कि PIL की शुरुआत उस दौर में हुई थी जब देश की बड़ी आबादी गरीबी, अशिक्षा और कानूनी संसाधनों की कमी के कारण अदालतों तक नहीं पहुंच पाती थी। उस समय यह व्यवस्था न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। सरकार के अनुसार, डिजिटल तकनीक, ई-फाइलिंग और आसान कानूनी प्रक्रियाओं ने अदालतों तक पहुंच को काफी सरल बना दिया है। आज कोई भी व्यक्ति सीधे पत्र के माध्यम से भी कोर्ट तक अपनी बात पहुंचा सकता है।

केंद्र ने तर्क दिया कि वर्तमान समय में PIL का दायरा इतना व्यापक हो गया है कि कई बार इसका उपयोग गैर-जरूरी या निजी हितों के लिए भी किया जा रहा है। ऐसे में इस व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है, ताकि न्यायिक प्रणाली पर अनावश्यक दबाव कम किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया: सतर्कता से हो रही सुनवाई

केंद्र के इस रुख पर सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालतें पहले की तुलना में अब कहीं अधिक सतर्कता के साथ PIL मामलों की सुनवाई करती हैं। उन्होंने कहा कि 2006 से 2026 के बीच स्थिति में काफी बदलाव आया है और अब कोर्ट केवल उन्हीं मामलों में नोटिस जारी करता है, जिनमें ठोस आधार होता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PIL एक महत्वपूर्ण संवैधानिक उपकरण है, लेकिन इसका दुरुपयोग रोकने के लिए न्यायपालिका खुद निगरानी रख रही है। इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि अदालत फिलहाल इस व्यवस्था को खत्म करने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इसे संतुलित तरीके से संचालित करने पर जोर दे रही है।

सबरीमाला सहित कई मामलों पर सुनवाई जारी

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 50 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा सबसे प्रमुख है। यह मामला पिछले 26 वर्षों से विभिन्न अदालतों में चल रहा है।

2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं, जिन पर अब विस्तृत सुनवाई हो रही है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल धार्मिक परंपराओं का नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का भी है।

धार्मिक स्वतंत्रता और न्यायिक दखल पर बहस

सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय से संबंधित नहीं है, उस धर्म की परंपराओं को चुनौती दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे सबरीमाला की परंपराओं के खिलाफ याचिका कैसे दायर कर सकते हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि अदालतों को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि हर समुदाय की अपनी मान्यताएं होती हैं। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है या समाज पर गंभीर प्रभाव डालती है, तो न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है।

कई धार्मिक मामलों पर होगा फैसला

इस सुनवाई में केवल सबरीमाला ही नहीं, बल्कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित प्रथाओं, पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकार और मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी फैसला होना है। ये सभी मामले धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

न्यायिक व्यवस्था में बदलाव की बहस तेज

केंद्र सरकार द्वारा PIL को खत्म करने की बात उठाए जाने के बाद न्यायिक व्यवस्था में सुधार और बदलाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जहां एक ओर सरकार इसे समय की मांग बता रही है, वहीं दूसरी ओर इसे आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा माना जा रहा है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

TheCGNews.in – छत्तीसगढ़ की सच्ची आवाज़ “TheCGNews.in” छत्तीसगढ़ का एक उभरता हुआ डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जो प्रदेश की ज़मीन से जुड़ी, वास्तविक और निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुँचाने के मिशन के साथ कार्यरत है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी ताकत है – स्थानीयता और विश्वसनीयता। TheCGNews.in का फोकस सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज पर नहीं, बल्कि उन खबरों पर है जो आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं – गांव, कस्बों, पंचायत, युवाओं, शिक्षा, रोजगार, राजनीति, संस्कृति और जन-समस्याओं की सच्ची झलक यहाँ देखने को मिलती है। TheCGNews.in की खास बातें: • ✅ छत्तीसगढ़ की हर कोने से रिपोर्टिंग • ✅ सिर्फ सनसनी नहीं – समाधान की पत्रकारिता • ✅ युवाओं और किसानों की आवाज़ • ✅ भ्रष्टाचार, विकास और बदलाव की असली रिपोर्ट • ✅ हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में खबरें

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई