
छत्तीसगढ़ में डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) अभ्यर्थियों का अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर जारी आंदोलन शनिवार को 117वें दिन में प्रवेश कर गया। लंबे समय से चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने ने अब एक व्यापक सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दे का रूप ले लिया है। अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों ने इस बार परशुराम जयंती के अवसर पर रामायण पाठ का आयोजन कर शांतिपूर्ण तरीके से सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
धार्मिक और सांस्कृतिक माध्यम से उठाई आवाज
अभ्यर्थियों ने आंदोलन स्थल पर भगवान परशुराम की जयंती मनाते हुए रामायण पाठ किया। उनका कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह एक प्रतीकात्मक प्रयास है, जिसके जरिए वे सरकार तक अपनी बात शांति और संस्कृति के माध्यम से पहुंचाना चाहते हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, वे पिछले कई महीनों से लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे उनमें निराशा के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान परशुराम न्याय और धर्म के प्रतीक हैं, और उनके आदर्शों को याद करते हुए वे अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। इस आयोजन के जरिए अभ्यर्थियों ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।
शिक्षा मंत्री के बंगले की ओर बढ़ी रैली
रामायण पाठ के बाद अभ्यर्थियों ने भगवा ध्वज के साथ शिक्षा मंत्री के बंगले की ओर रैली निकाली। इस रैली का उद्देश्य सीधे सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना था। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और सरकार से संवाद की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
रैली के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए, जो शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे थे। उनके हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर नियुक्ति की मांग को लेकर संदेश लिखे हुए थे।
पुलिस ने तूता धरना स्थल पर रोका, प्रशासन पर लगाए आरोप
हालांकि, जैसे ही रैली तूता धरना स्थल के पास पहुंची, पुलिस प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। अभ्यर्थियों को गेट पर ही रोक दिया गया, जिससे वे शिक्षा मंत्री के बंगले तक नहीं पहुंच सके। इस दौरान कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति भी बनी, लेकिन अभ्यर्थियों ने संयम बनाए रखा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखा।
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है और संवाद से बच रही है। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर होती, तो अब तक कोई न कोई समाधान निकल चुका होता।
2300 पदों से आगे बढ़कर बनी अधिकार की लड़ाई
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन अब केवल 2300 पदों पर नियुक्ति की मांग तक सीमित नहीं रहा है। यह अब उनके अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई बन चुका है। उनका मानना है कि यदि योग्य अभ्यर्थियों को समय पर नियुक्ति नहीं दी जाती, तो इससे शिक्षा व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
लगातार 117 दिनों से जारी इस आंदोलन ने अब राज्य के विभिन्न वर्गों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कई सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है और सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
जनसमर्थन जुटाने की अपील, आंदोलन को जनांदोलन बनाने की कोशिश
अभ्यर्थियों ने प्रदेश की जनता, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इस आंदोलन का समर्थन करें। उनका कहना है कि यदि यह आंदोलन जनांदोलन का रूप लेता है, तो सरकार पर दबाव बनेगा और उन्हें अपनी मांगों को मानने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थियों का दृढ़ संकल्प है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे और न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे।
इस बीच, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस लंबे समय से चल रहे आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है और क्या अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।
Author: THE CG NEWS
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