
केंद्र सरकार इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर की विस्तृत जांच करेगी। समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को आशंका है कि यह फीचर जहां एक ओर यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी आड़ में पहचान छिपाकर साइबर ठगी, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसी वजह से सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों और संभावित जोखिमों का तकनीकी स्तर पर मूल्यांकन करने की तैयारी कर रही है।
WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने हाल ही में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसके जरिए यूजर अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल एक यूनिक यूजरनेम के माध्यम से नए लोगों से बातचीत कर सकेंगे। यह सुविधा चरणबद्ध तरीके से दुनिया भर के यूजर्स के लिए जारी की जा रही है। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स को अधिक प्राइवेसी देना और नए लोगों से सुरक्षित तरीके से जुड़ने का विकल्प उपलब्ध कराना है।
सरकार को किस बात की है चिंता
अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि यदि मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत की सुविधा मिल जाती है, तो साइबर अपराधी किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित के लिए वास्तविक व्यक्ति और फर्जी अकाउंट के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
भारत में WhatsApp के 50 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क में यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं रही तो फिशिंग, ऑनलाइन ठगी और पहचान छिपाकर किए जाने वाले साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नया फीचर भारतीय कानूनों और डिजिटल सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।
29 जून से शुरू हुई यूजरनेम बुकिंग
Meta ने 29 जून से वैश्विक स्तर पर यूजरनेम रिजर्व करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा एक साथ सभी यूजर्स को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में जारी करेगी। जब किसी यूजर के क्षेत्र में यह फीचर उपलब्ध होगा, तब WhatsApp ऐप के भीतर नोटिफिकेशन के माध्यम से इसकी जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पसंदीदा यूजरनेम सुरक्षित करने के लिए शुरुआती दौर में ही उसे बुक करना लाभदायक हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और एक ही नाम दो लोगों को उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
कैसे काम करेगा नया यूजरनेम फीचर
इस फीचर के लागू होने के बाद कई परिस्थितियों में मोबाइल नंबर स्वतः दिखाई नहीं देगा। यदि कोई व्यक्ति पहली बार आपसे संपर्क करता है या किसी बड़े ग्रुप में आपको जोड़ता है, तो वह आपके मोबाइल नंबर की बजाय केवल आपका यूजरनेम देख सकेगा। हालांकि जिन लोगों के पास पहले से आपका मोबाइल नंबर सेव है या जिनसे पहले से बातचीत हो चुकी है, उनके लिए कोई बदलाव नहीं होगा।
WhatsApp ने स्पष्ट किया है कि अकाउंट बनाने और सेवा का उपयोग करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह आवश्यक रहेगा। केवल नए संपर्कों के सामने नंबर छिपाने का विकल्प मिलेगा, जिससे व्यक्तिगत जानकारी अधिक सुरक्षित रहेगी।
यूजरनेम बनाने के लिए तय किए गए नियम
कंपनी के अनुसार प्रत्येक यूजरनेम 3 से 35 कैरेक्टर के बीच होगा। इसमें केवल छोटे अंग्रेजी अक्षर (a-z), अंक (0-9), डॉट (.) और अंडरस्कोर (_) का उपयोग किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और आवश्यकता पड़ने पर यूजर उसे बदल या अपडेट भी कर सकेंगे।
WhatsApp ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी प्रकार की सार्वजनिक यूजरनेम डायरेक्टरी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। कंपनी किसी दूसरे व्यक्ति को आपका यूजरनेम सुझाव (Suggest) भी नहीं देगी। यानी केवल वही व्यक्ति आपसे संपर्क कर सकेगा, जिसे आपका सही यूजरनेम पता होगा।
‘Username Key’ से मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा
Meta इस फीचर के साथ Username Key नाम का एक नया सुरक्षा विकल्प भी ला रही है। यह एक वैकल्पिक सुरक्षा पिन की तरह कार्य करेगा। यदि कोई यूजर इसे सक्रिय करता है, तो केवल यूजरनेम जान लेना किसी अनजान व्यक्ति के लिए पर्याप्त नहीं होगा। पहली बार संदेश भेजने से पहले उसे संबंधित सुरक्षा Key दर्ज करनी होगी। कंपनी का मानना है कि इससे स्पैम और अनचाहे संदेशों में कमी आएगी तथा यूजर्स की गोपनीयता और मजबूत होगी।
सरकार की नजर सुरक्षा मानकों पर
डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजरनेम आधारित पहचान भविष्य में ऑनलाइन संचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है, लेकिन इसके साथ मजबूत सत्यापन और सुरक्षा प्रणाली भी आवश्यक होगी। इसी कारण केंद्र सरकार इस फीचर की बारीकी से समीक्षा करेगी ताकि प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
फिलहाल Meta की ओर से यूजरनेम फीचर का वैश्विक रोलआउट जारी है, जबकि भारत में इसे चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की जांच के बाद यदि किसी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय की आवश्यकता महसूस होती है, तो भविष्य में इस फीचर से जुड़े दिशा–निर्देश या सुझाव भी जारी किए जा सकते हैं।
Author: THE CG NEWS
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