
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी सहित बिजली विभाग की विभिन्न इकाइयों में कार्यरत 2,471 से अधिक संविदा कर्मचारी अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि वर्षों से नियमित कर्मचारियों की तरह जोखिम भरे कार्य करने के बावजूद उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं दी गई है। वे विभाग में रिक्त पदों पर समायोजन और नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसी क्रम में शुक्रवार को जल-समाधि आंदोलन का भी ऐलान किया गया है।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से बिजली विभाग की रीढ़ बनकर काम कर रहे हैं। बिजली आपूर्ति बनाए रखने से लेकर लाइन सुधार, फॉल्ट दुरुस्ती और अन्य तकनीकी कार्यों तक में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिलती हैं और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा। उनका आरोप है कि सरकार और विभाग लगातार आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राजिम में पदस्थ संविदा कर्मचारी महेश्वर साहू ने बताया कि वे पिछले आठ से दस वर्षों से बिजली विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले संविदा कर्मचारियों को कुछ वर्षों बाद नियमित करने की व्यवस्था थी, लेकिन वर्ष 2018-19 की भर्ती के बाद से किसी भी कर्मचारी का नियमितीकरण नहीं किया गया। भर्ती के समय यह स्पष्ट किया गया था कि उनसे केवल मैदानी क्षेत्र का सामान्य कार्य कराया जाएगा और हाई वोल्टेज लाइन या खंभों पर चढ़कर काम नहीं लिया जाएगा। लेकिन वर्ष 2021 के बाद परिस्थितियां बदल गईं और संविदा कर्मचारियों से भी नियमित कर्मचारियों की तरह जोखिम भरे कार्य कराए जाने लगे।
कर्मचारियों का दावा है कि बीते कुछ वर्षों में ड्यूटी के दौरान लगभग 100 संविदा कर्मचारी विभिन्न दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं। इनमें से 43 कर्मचारियों की जान जा चुकी है, जबकि करीब 20 मौतें सीधे बिजली करंट से जुड़े हादसों में हुईं। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि कई मामलों में मृतक कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सहायता भी लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद ही मिल सकी। उनका आरोप है कि विभाग दुर्घटनाओं के बाद जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करता है।
संविदा कर्मचारियों ने नई एचआर नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हाल ही में लागू की गई नीति के तहत उन्हें लाइन परमिट जारी करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गई हैं। जबकि यह कार्य पहले नियमित कर्मचारियों के अधिकार क्षेत्र में आता था। कर्मचारियों का कहना है कि जब उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह हर प्रकार का कार्य लिया जा रहा है, तो उन्हें वेतन, सुरक्षा, बीमा और अन्य सुविधाएं भी समान रूप से मिलनी चाहिए।
आंदोलन में शामिल संविदा कर्मचारी धनंजय कुमार ने बताया कि बिजली विभाग की विभिन्न कंपनियों में लगभग 8 हजार पद रिक्त हैं, लेकिन लंबे समय से नियमित भर्ती नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिजली व्यवस्था का बड़ा हिस्सा संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है। इसके बावजूद इन कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि बिजली विभाग जैसी अत्यावश्यक सेवा में स्थायी कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जिससे कार्य का दबाव भी बढ़ रहा है।
विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरिचरण साहू ने कहा कि बिजली विभाग में कार्य करना अत्यंत जोखिम भरा होता है। हाई वोल्टेज लाइनों पर काम करने के दौरान हर दिन कर्मचारियों की जान जोखिम में रहती है। इसके बावजूद दुर्घटना होने पर संविदा कर्मचारियों को मात्र चार लाख रुपये का बीमा मिलता है, जो इस प्रकार के जोखिम के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रबंधन केवल आश्वासन देकर मामला टाल देता है, लेकिन धरातल पर कोई समाधान नहीं निकलता।
संविदा कर्मचारी प्रदीप राठौर ने आरोप लगाया कि कई बार वरिष्ठ अधिकारी मौखिक निर्देश देकर संविदा कर्मचारियों से ऐसे कार्य कराते हैं, जिनकी उन्हें आधिकारिक अनुमति नहीं होती। यदि किसी प्रकार की दुर्घटना हो जाती है तो पूरी जिम्मेदारी कर्मचारी पर डाल दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार नियमितीकरण, रिक्त पदों पर समायोजन, बेहतर बीमा और समान सुविधाओं की मांग पूरी नहीं करती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। फिलहाल बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों का आंदोलन राज्य सरकार और विभागीय प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
Author: THE CG NEWS
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