
नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026: पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार, 31 अगस्त को सुनवाई होगी। याचिका में देशभर के पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को यह स्पष्ट रूप से बताने की मांग की गई है कि जिस पेट्रोल की बिक्री की जा रही है, उसमें कितने प्रतिशत एथेनॉल मिला हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट की 31 अगस्त की कॉज लिस्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ करेगी। याचिका नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दाखिल की गई है।
पेट्रोल पंप के नोजल पर लिखने की मांग
याचिका में केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि देश के हर पेट्रोल पंप के फ्यूल डिस्पेंसिंग नोजल पर पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल का सटीक प्रतिशत स्पष्ट और एक समान तरीके से प्रदर्शित किया जाए।
इसके अलावा, ग्राहकों को मिलने वाले ईंधन बिल या रसीद पर भी एथेनॉल का प्रतिशत दर्ज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे वाहन मालिकों को अपने वाहन के लिए उपयुक्त ईंधन चुनने में मदद मिलेगी और ईंधन की संरचना को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी।
E20 पेट्रोल और पुराने वाहनों को लेकर चिंता
याचिका में E20 पेट्रोल, यानी 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल, के मौजूदा वाहनों पर प्रभाव का स्वतंत्र आकलन कराने की भी मांग की गई है।
इसके लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के प्रतिनिधियों और स्वतंत्र ऑटोमोबाइल इंजीनियरों वाली एक विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
समिति से ईंधन दक्षता, इंजन की उम्र, रखरखाव खर्च, वाहन वारंटी और बीमा पर संभावित प्रभाव का अध्ययन करने की मांग की गई है।
हर वाहन के लिए बने एथेनॉल-कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस
याचिका में सरकार से एक सार्वजनिक और वाहन-वार डेटाबेस तैयार करने की भी मांग की गई है। इसमें वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई है कि कौन-सा वाहन किस स्तर के एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए उपयुक्त है।
याचिकाकर्ता ने पुराने और ऐसे वाहनों के लिए, जो अधिक एथेनॉल मिश्रण के अनुकूल नहीं हैं, एक समयबद्ध और पारदर्शी ट्रांजिशन प्लान बनाने की मांग भी की है। जहां तकनीकी और आपूर्ति की दृष्टि से संभव हो, वहां कम एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने पर भी विचार करने की मांग की गई है।
खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण का मुद्दा भी उठाया
याचिका में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के व्यापक प्रभावों की समीक्षा की मांग की गई है। इसमें टेलपाइप उत्सर्जन, एथेनॉल उत्पादन में पानी की खपत और एथेनॉल बनाने के लिए कृषि उपज के इस्तेमाल से खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
साथ ही, याचिकाकर्ता ने E20 को लागू करने से संबंधित नीति दस्तावेज, तकनीकी अध्ययन, वाहन-कम्पैटिबिलिटी रिपोर्ट, सुरक्षा मानक और उपभोक्ता सलाह जैसे रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखने की मांग की है।
31 अगस्त को क्या होगा?
फिलहाल यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इसका मतलब यह नहीं है कि 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट अनिवार्य रूप से पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल प्रतिशत लिखने का अंतिम आदेश दे देगा। अदालत सुनवाई के दौरान याचिका और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट उपभोक्ताओं को पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल की मात्रा की स्पष्ट जानकारी देने और E20 के प्रभावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग पर क्या रुख अपनाता है।
Author: THE CG NEWS
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