अब स्कूलों में पढ़ाई जाएगी ‘हेल्थ एजुकेशन’: छात्रों को सिखाई जाएगी सेहत की सही समझ

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अब हर हफ्ते होगी हेल्थ एजुकेशन — स्कूलों में फाइज़िकल वेलनेस से जुड़े विषयों पर शिक्षक देंगे जानकारी

पटना | बिहार शिक्षा विभाग ने बड़ा निर्णय लेते हुए कक्षा 6 से 12 तक के सभी सरकारी स्कूलों में स्वास्थ्य और वेलनेस एजुकेशन को अनिवार्य कर दिया है । इस पहल का उद्देश्य छात्रों को स्वस्थ जीवनशैली की सही जानकारी देना है ताकि वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सक्षम बन सकें।

कौन सा होगा पाठ्यक्रम और इसकी रूपरेखा?

— प्रत्येक स्कूल में स्वास्थ्य एवं वेलनेस दिवस हर हफ्ते एक दिन आयोजित होगा, जिसमें दो प्रशिक्षित शिक्षक बच्चों को यह सिखाएंगे  ।
— बच्चे सीखेंगे पर्सनल हाइजीन, संतुलित भोजन, मानसिक स्वास्थ्य, स्ट्रेस मैनेजमेंट और डिजिटल डिटॉक्स जैसे महत्वपूर्ण विषय।
— हर त्रैमासिक ‘किशोर स्वास्थ्य एवं कल्याण दिवस’ बड़े स्तर पर मनाया जाएगा, जिसमें ब्लॉक और जिला स्तर पर समीक्षा और जागरूकता सत्र होंगे ।

शिक्षकों का प्रशिक्षण और देखरेख की प्रणाली

— प्रत्येक स्कूल से दो शिक्षक ‘स्वास्थ्य एवं वेलनेस दूत’ बनाए गए हैं, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कराया गया है ।
— इन शिक्षकों द्वारा साप्ताहिक सत्र संचालित किए जाएंगे, और हर महीने CAHP मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से रिपोर्ट की जाएगी, जिससे निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके ।

पाठ्यक्रम का क्या असर दिखाई देगा?

विशेषज्ञों और क्षेत्रीय अधिकारियों का मानना है कि स्कूल स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा मिलना बेहद सकारात्मक कदम है। इससे न केवल बच्चों को स्वस्थ आदतें सिखाई जाएंगी, बल्कि मन-शरीर की मजबूती, आत्मविश्वास, और सामाजिक समझ को भी बढ़ावा मिलेगा।

— WHO की रिपोर्ट में उल्लेखित है कि स्वास्थ्य-प्रोत्साहक स्कूल कार्यक्रम बच्चों में दीर्घकालिक सकारात्मक बदलाव लाते हैं ।
— यही उद्देश्य शिक्षा विभाग ने बिहार के सरकारी स्कूलों में लागू किया है, जिससे बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

सरकारी और निजी प्रयासों का सहयोग

बिहार की इस पहल को UNESCO के समान कार्यक्रमों से प्रेरणा मिली है। उदाहरण के तौर पर, UNESCO और CBSE/NCERT का संयुक्त School Health and Wellness Programme (SHWP) 30,000 स्कूलों में लागू है, जिसमें 15 मिलियन छात्रों को फायदा मिल रहा है  ।

— UNESCO की पहल का लक्ष्य बच्चों को शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक स्वास्थ्य के संदर्भों में आत्मनिर्भर बनाना है, जो बिहार की पहल के अनुरूप है।

निष्कर्ष: शिक्षण ही नहीं, स्वास्थ्य की भी दे रहे शिक्षा

अब बिहार में पढ़ाई सिर्फ गणित या विज्ञान तक ही सीमित नहीं रहेगी; स्कूली बच्चों को हेल्थ एजुकेशन के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली के आदर्श भी सिखाए जाएंगे। यह बदलाव पीढ़ी को मजबूत, सजग और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रेरक कदम है।

जैसे शिक्षा नीति ने शिक्षा को समावेशी बनाया, वैसे ही स्वास्थ्य शिक्षा की यह पहल छात्रों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दृष्टिकोण से संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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