
दिल्ली में आयोजित Annual Legal Conclave 2025 में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2020 के कृषि कानूनों के विरोध के दौरान दिवंगत वित्त एवं कानून मंत्री अरुण जेटली को उन्हें धमकाने के लिए भेजा था। राहुल ने कार्यक्रम में कहा, “जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तब अरुण जेटली जी मुझे धमकाने आए। उन्होंने कहा कि अगर आपने यह विरोध जारी रखा, तो हम आपके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मैंने जवाब दिया कि आपको पता नहीं है कि आप किससे बात कर रहे हैं।”
राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी। भाजपा ने इसे “तथ्यात्मक रूप से गलत” बताते हुए पलटवार किया और अरुण जेटली के परिवार ने भी इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
जेटली परिवार का जवाब
अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि उनके पिता का निधन 24 अगस्त 2019 को हो गया था, जबकि तीन विवादित कृषि कानून सितंबर 2020 में संसद से पारित हुए। रोहन ने कहा, “मेरे पिता का किसी को धमकाने का स्वभाव नहीं था। वे हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और संवाद में विश्वास रखते थे। यह दावा न केवल असत्य है, बल्कि दिवंगत के सम्मान के खिलाफ है।”
भाजपा का हमला
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह “फेक न्यूज” और “भ्रामक प्रचार” है। मालवीय ने समयरेखा बताते हुए कहा कि अरुण जेटली 2019 में ही नहीं रहे, जबकि कृषि कानूनों पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया 2020 में हुई। ऐसे में यह दावा पूरी तरह असंगत है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने बिना जांच-पड़ताल के यह बयान दिया, जो राजनीतिक नैतिकता के खिलाफ है।
कांग्रेस नेता का चुनाव आयोग पर भी निशाना
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने केवल अरुण जेटली पर ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में कम से कम 15 सीटें धांधली के चलते भाजपा के पक्ष में गईं और चुनाव आयोग “पूरी तरह खत्म होकर भाजपा के नियंत्रण में आ गया है”। राहुल ने दावा किया कि कांग्रेस के पास इस धांधली के “खुले और बंद” सबूत हैं, जिन्हें वे जल्द सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को “मृत” करार दिया और कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए सच्चाई सामने लानी जरूरी है।
चुनाव आयोग और भाजपा का पलटवार
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार और बिना सबूत वाला बताया। आयोग के अनुसार, राहुल गांधी ने कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं करवाई, बल्कि मंच से बयानबाजी की। भाजपा नेताओं ने भी कहा कि राहुल गांधी का यह रुख चुनाव हार के बाद बहाने खोजने जैसा है। भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने तंज कसा, “जब कांग्रेस हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में चुनाव जीतती है, तब चुनाव आयोग ठीक होता है, लेकिन जब हार होती है, तो आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं।”
राजनाथ सिंह का बयान
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राहुल गांधी के “एटम बम” वाले बयान को अतिशयोक्ति बताते हुए कहा कि इस तरह के दावे पहले भी कई बार किए गए हैं और हर बार वे “दम तोड़ते पटाखे” साबित हुए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता की रक्षा करने की बात कही।
विवाद का असर और राजनीतिक मायने
यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है। राहुल गांधी द्वारा दिवंगत नेता का नाम लेकर लगाए गए आरोप ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। भाजपा इसे कांग्रेस की “राजनीतिक हताशा” बता रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वह अपने आरोपों के सबूत पेश करेगी।
हालांकि, समयरेखा के अनुसार यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत प्रतीत होता है, क्योंकि अरुण जेटली के निधन और कृषि कानूनों के पारित होने के बीच लगभग एक साल का अंतर है। यह मामला आने वाले दिनों में संसद और मीडिया में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
Author: THE CG NEWS
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