
छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार दो केरल की कैथोलिक ननों—सिस्टर प्रीती मैरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस—को विशेष एनआईए अदालत ने जमानत दे दी है। इनके साथ गिरफ्तार आदिवासी युवक सुखमन मंडावी को भी जमानत दी गई है। ये तीनों 25 जुलाई को मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। आरोप था कि ये नारायणपुर की तीन युवतियों को नौकरी और वेतन का लालच देकर आगरा ले जा रहे थे।
पीड़िता का गंभीर आरोप
इस मामले में एक 21 वर्षीय युवती, जिसे पुलिस ने पीड़ित बताया था, ने चौंकाने वाला बयान दिया। उसने दावा किया कि बजरंग दल से जुड़े कुछ लोगों ने उसे धमकाकर और पीट-पीटकर बयान बदलने के लिए मजबूर किया। युवती के अनुसार, पुलिस ने भी उसकी बात नहीं सुनी और बाहरी लोगों के कथनों पर भरोसा कर एफआईआर दर्ज कर दी। उसने कहा कि उसका परिवार वर्षों से ईसाई धर्म का पालन करता है और वह अपनी मर्जी से यात्रा कर रही थी।
राजनीतिक और धार्मिक संगठनों का विरोध
गिरफ्तारी के बाद से ही यह मामला राजनीतिक और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया। केरल में कांग्रेस, सीपीएम, कैथोलिक चर्च और कई सामाजिक संगठनों ने ननों की गिरफ्तारी का विरोध किया। कांग्रेस नेता और केरल पीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। सीपीएम नेता एम. वी. गोविंदन ने इस कार्रवाई को संघ परिवार की सोची-समझी रणनीति करार दिया। कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने भी केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर से मुलाकात कर ननों की तत्काल रिहाई की मांग की।
एनआईए अदालत का फैसला
2 अगस्त को बिलासपुर स्थित विशेष एनआईए अदालत ने सिस्टर प्रीती मैरी, सिस्टर वंदना फ्रांसिस और सुखमन मंडावी को सशर्त जमानत दे दी। अदालत ने प्रत्येक को 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदार प्रस्तुत करने का आदेश दिया। साथ ही पासपोर्ट जमा करने और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्त लगाई गई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर मुख्यतः आशंका और अनुमान पर आधारित है तथा युवतियों के अभिभावकों ने भी यह स्पष्ट किया कि उनका परिवार पहले से ईसाई धर्म का पालन करता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपितों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और पुलिस ने भी हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं जताई।
नौ दिनों का घटनाक्रम
•25 जुलाई: दुर्ग रेलवे स्टेशन से दो ननों और एक युवक को गिरफ्तार किया गया।
•30 जुलाई: केरल में कांग्रेस, सीपीएम और चर्च के बैनर तले विरोध प्रदर्शन हुए।
•31 जुलाई-1 अगस्त: पीड़िता ने दबाव और धमकी में बयान बदलवाने का आरोप लगाया।
•1 अगस्त: वकीलों और नेताओं ने एनआईए कोर्ट में जमानत के पक्ष में दलीलें दीं।
•2 अगस्त: विशेष एनआईए अदालत ने तीनों आरोपितों को जमानत दी।
निष्कर्ष
यह मामला अब केवल एक आपराधिक केस नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक, धार्मिक और मानवाधिकार बहस का मुद्दा बन चुका है। पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप और अदालत की टिप्पणियों ने इस प्रकरण को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद दिल्ली से लेकर केरल तक राजनीतिक हलचल को और तेज कर सकता है।
Author: THE CG NEWS
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