
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर गायों का मुद्दा गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद सरकार ने बड़े पैमाने पर गौठान बंद कर दिए, जिसके कारण मवेशियों को खुले में भटकना पड़ रहा है और उनकी मौतें हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले 20 दिनों में 50 से अधिक गायों की सड़कों पर और खुले में मरने की खबरें सामने आई हैं। इस घटनाक्रम पर बघेल ने कहा कि “गौ-माता का श्राप भाजपा को जरूर लगेगा, क्योंकि उन्होंने उनकी उपेक्षा की है।”
गौठान योजना पर विवाद
भूपेश बघेल के मुताबिक, उनकी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए ‘गौठान’ योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत गांवों में विशेष स्थान बनाकर वहां मवेशियों के लिए चारा, पानी और देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी। बघेल का आरोप है कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही इस योजना की अनदेखी की और कई गौठान बंद कर दिए। उन्होंने कहा कि गौठान सिर्फ गायों के लिए आश्रय स्थल नहीं थे, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार और जैविक खाद उत्पादन का भी केंद्र थे।
सड़कों पर भटकते मवेशी और मौतों का सिलसिला
बघेल ने बताया कि गौठान बंद होने के बाद बड़ी संख्या में मवेशी सड़कों पर और खाली जगहों पर भटक रहे हैं। पर्याप्त भोजन और देखभाल न मिलने से उनकी हालत खराब हो रही है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि मात्र 20 दिनों में 50 से अधिक गायों की मौत हुई है, जो कि सरकारी लापरवाही का नतीजा है। बघेल का कहना है कि यह सिर्फ पशु कल्याण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन और आस्था से भी जुड़ा मामला है।
‘गौ-माता का श्राप’ – राजनीतिक संदेश
भूपेश बघेल ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा, “जो लोग चुनाव के समय गौ-माता के नाम पर राजनीति करते हैं, आज वही उनकी मौत के जिम्मेदार हैं। गौ-माता का श्राप उन्हें जरूर लगेगा।” इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बघेल का यह वक्तव्य स्पष्ट रूप से भाजपा की ‘हिंदुत्व’ छवि पर चोट करने और ग्रामीण व धार्मिक मतदाताओं को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा की सफाई
हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार गौठानों को बंद नहीं कर रही, बल्कि उन्हें पुनर्गठित और सुव्यवस्थित करने का काम कर रही है। भाजपा प्रवक्ता का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में गौठान योजना में अनियमितताएं कीं और कई स्थानों पर यह सिर्फ कागजों में ही संचालित हो रही थी। भाजपा का दावा है कि मौजूदा सरकार मवेशियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और गौठानों को व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाने पर काम कर रही है।
गाय का मुद्दा और छत्तीसगढ़ की राजनीति
गाय और गौठान का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों का आर्थिक और धार्मिक महत्व काफी गहरा है। कांग्रेस सरकार ने ‘गोधन न्याय योजना’ के जरिए गायों से निकले गोबर को खरीदने और उससे जैविक खाद बनाने की व्यवस्था शुरू की थी। इस योजना को ग्रामीणों से अच्छा समर्थन मिला, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद इसमें भी बदलाव की चर्चा है। भूपेश बघेल इस बदलाव को भाजपा की ‘गाय के प्रति असंवेदनशीलता’ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे ‘सुधार और पारदर्शिता’ का प्रयास बता रही है।
आने वाले समय में बढ़ सकती है सियासी गर्मी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में गाय और गौठान का मुद्दा छत्तीसगढ़ में बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनेगा। कांग्रेस इस मुद्दे को ग्रामीण और धार्मिक वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भुनाने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा इस मामले में अपनी नीति और सुधार कार्यों को जनता के सामने रखने का प्रयास करेगी। फिलहाल, भूपेश बघेल के ‘गौ-माता का श्राप’ वाले बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और इस पर आने वाले दिनों में और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
Author: THE CG NEWS
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