विदेश यात्रा के लिए कर्ज लेने का बढ़ता चलन: भारतीयों में क्यों बढ़ रही है ट्रैवल पर खर्च करने की लत?

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भारत में हाल के वर्षों में एक नया सामाजिक और आर्थिक ट्रेंड तेजी से उभरकर सामने आया है — विदेश यात्रा पर बढ़ता खर्च और ट्रैवल के लिए लोन लेने की प्रवृत्ति। यह चलन अब सिर्फ उच्च वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडल क्लास और युवा प्रोफेशनल्स भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। बदलते जीवन दृष्टिकोण, सोशल मीडिया का प्रभाव, और यात्रा को एक लाइफस्टाइल के रूप में देखने की मानसिकता ने इस बदलाव को मजबूती दी है।

सोशल मीडिया बना प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत

आज के दौर में इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रैवल व्लॉगर्स और इंफ्लुएंसर्स का बोलबाला है। वे न सिर्फ दुनिया के खूबसूरत देशों और शहरों को दिखाते हैं, बल्कि वहां के अनुभवों को इतने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं कि देखने वाला भी उस अनुभव को जीने की ख्वाहिश करने लगता है। इससे खासकर युवाओं में विदेश यात्रा के प्रति आकर्षण कई गुना बढ़ गया है।

पहले जहां विदेश यात्रा एक खास अवसर होती थी, वहीं अब यह एक ‘मस्ट हैव एक्सपीरियंस’ बन गया है, जिसे हासिल करने के लिए लोग कर्ज लेने से भी नहीं हिचकिचा रहे।

ईएमआई और पर्सनल लोन से आसान हुआ सपना

ट्रैवल कंपनियां और बैंकिंग सेक्टर ने भी इस ट्रेंड को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। ‘ट्रैवल ऑन ईएमआई’, ‘जीरो इंटरेस्ट क्रेडिट कार्ड ऑफर्स’ और ‘बाय नाउ पे लेटर’ जैसी योजनाओं के चलते अब विदेश यात्रा का सपना सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं रहा। मिडल क्लास युवक-युवतियां, नई नौकरी करने वाले प्रोफेशनल्स, यहां तक कि कुछ मामलों में रिटायर्ड लोग भी कर्ज लेकर अपनी ड्रीम ट्रिप पर निकल रहे हैं।

2024-25 की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में पर्सनल लोन लेने वालों की बड़ी संख्या ने इसका उपयोग यात्रा खर्चों के लिए किया है। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है।

कोविड के बाद बदला जीवन का नजरिया

कोरोना महामारी ने दुनिया भर में लोगों के सोचने का तरीका बदल दिया। लॉकडाउन के लंबे दौर, अनिश्चित भविष्य और जीवन की क्षणभंगुरता ने लोगों को यह अहसास कराया कि ‘कल’ का कोई भरोसा नहीं। नतीजा यह हुआ कि लोग अब अनुभवों को प्राथमिकता देने लगे हैं, बजाय लंबे समय की योजनाओं के।

यही वजह है कि 2022 के बाद जैसे ही ट्रैवल बैन हटे, भारतीय पर्यटक बड़ी संख्या में विदेश यात्राओं के लिए निकल पड़े। खासकर जापान, यूरोप, थाईलैंड, दुबई, सिंगापुर, मलेशिया और मालदीव जैसे डेस्टिनेशन भारतीयों के पसंदीदा बन गए हैं।

बदलती प्राथमिकताएं और नई पीढ़ी की सोच

भारतीय समाज में एक समय था जब ‘बचत’, ‘घर खरीदना’, और ‘भविष्य के लिए निवेश’ सबसे बड़ी प्राथमिकताएं मानी जाती थीं। लेकिन अब ‘YOLO’ (You Only Live Once) का सिद्धांत तेजी से लोगों की सोच में उतर चुका है। नई पीढ़ी के लिए विदेश यात्रा न केवल मौज-मस्ती, बल्कि आत्म-खोज, मानसिक विश्राम और आत्मसंतोष का माध्यम भी है।

कई युवा अब शादी या गाड़ी खरीदने जैसे बड़े खर्चों को टाल कर पहले ट्रैवल का अनुभव लेना चाहते हैं। यह सोच कहीं न कहीं भारतीय सामाजिक ढांचे में भी बदलाव का संकेत देती है।

भविष्य में ट्रैवल का यह ट्रेंड और तेज़ी पकड़ेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड और तेजी से बढ़ेगा। जैसे-जैसे लोग अनुभवों को संपत्ति और बचत से ऊपर महत्व देने लगेंगे, वैसे-वैसे ट्रैवल पर खर्च भी बढ़ता जाएगा। सरकार और पर्यटन उद्योग को इस ट्रेंड को समझकर उसे सपोर्ट करने की रणनीति बनानी चाहिए, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिले।

निष्कर्ष

भारत में अब यात्रा केवल एक ‘शौक’ नहीं रही, यह नई पीढ़ी की जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुकी है। लोन लेकर यात्रा करना भले ही कुछ लोगों के लिए जोखिम भरा लगे, लेकिन आज के युवाओं के लिए यह उनके जीवन को समृद्ध और संतुलित करने का एक तरीका बन गया है। यदि यह ट्रेंड जिम्मेदारी के साथ अपनाया जाए, तो यह न केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम बन सकता है, बल्कि पर्यटन उद्योग और अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद सिद्ध हो सकता है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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