भूपेश बघेल का बीजेपी-RSS पर हमला: आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी-दिवस का आयोजन नहीं, आदेश RSS का?

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने आज एक आदिवासी सम्मेलन की कटघरी में तंज भरा हमला करते हुए बीते विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) पर राज्य सरकार द्वारा कोई कार्यक्रम आयोजित न करने पर भाजपा और RSS को निशाने पर लिया। उन्होंने सीधे कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद यह आयोजन RSS के आदेश पर रद्द कर दिया गया।  

कार्यक्रम रद्द: RSS का दबाव?

बघेल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिवासी-दिवस के आयोजन के लिए पहले तो प्रोटोकॉल जारी किया था, लेकिन बाद में “संघ कार्यालय से आदेश आने के बाद” यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। उन्होंने सैद्धांतिक व्यंग्य करते हुए कहा कि “विष्णुदेव साय शेषनाग की सैय्या पर सो रहे हैं”—यह दर्शाता है कि वे इस मामले में निष्क्रिय बने रहे।  

अधिकारों की अनदेखी — रोजगार, वन अधिकार, पेशा कानून

सम्मेलन में भूपेश ने आगे कहा कि आदिवासियों को पहले जो अधिकार—जैसे पेशा कानून, वन अधिकार अधिनियम और पर्यावरण अधिकार—दिए गए थे, उनका उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना था कि आदिवासियों से रोजगार छीना जा रहा है और उनकी पहचान मिटाने की साफ़ कोशिश की जा रही है।  

कांग्रेस सरकार के मुकाबले BJP की उदासीनता श्रेयनीय?

भूपेश ने यह भी कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान विश्व आदिवासी दिवस को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता था और पूरे राज्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते थे। उन्होंने यह सवाल उठाया कि आज आदिवासी बहुल राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री होने पर भी सरकार ने यह सम्मान क्यों नहीं बरकरार रखा। 

बिजली बिल पर तीखा व्यंग्य

राजनीतिक हमला जारी रखते हुए भूपेश ने वर्तमान सरकार पर करारा व्यंग्य करते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़ में बिजली का बिल साय-साय बढ़ रहा है”—यह उनके अनुसार गरीब, किसान और आदिवासी वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का संकेत है। 

निष्कर्ष: राजनीतिक आरोप या सांस्कृतिक संवेदनशीलता का सवाल?

यह आरोप सिर्फ राजनीतिक भाषा में नहीं ठहरता। यह संवेदनशील मुद्दा—एक आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्वयं आदिवासी-दिवस का आयोजन न करने की मौन सहमति—आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। बघेल का आरोप है कि यह ठीक उसी समय हुआ जब आदिवासी सम्मान और अधिकारों के विषय पर चर्चा चरम पर थी।

दूसरी ओर, भाजपा या RSS की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या सफाई नहीं आई है। इस मुद्दे ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय, उनके अधिकार, सांस्कृतिक पहचान और राज्य सरकार के रवैये पर व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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