
आज राजधानी में उच्च राजनीतिक तनाव के बीच, संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय तक विरोध मार्च निकाल रहे कई विपक्षी सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम ने सुर्खियों में खलबली मचा दी और भारत के लोकतांत्रिक अनुशासन और राजनीतिक संघर्ष की दिशा सवालों में ला दी।
विरोध की पृष्ठभूमि: “वोट चोरी” और SIR पर आरोप
INDIA ब्लॉक के सांसदों ने Special Intensive Revision (SIR) को ‘मत चोरी’ से जोड़ते हुए इसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि बिहार में मतदाता सूची में बिना प्रमाण-पत्र (जैसे जन्मतिथि या पासपोर्ट) के बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे व्यापक जनसंख्या—विशेषकर वंचित वर्ग व अल्पसंख्यक—मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं
मार्च की शुरुआत और पुलिस अवरोध
सुबह 11:30 बजे संसद के मकर द्वार से यह मार्च शुरू हुआ, लेकिन जैसे ही विरोधी सांसद ट्रांसपोर्ट भवन के पास पहुंचे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। अनुमत न होने का हवाला देते हुए कई प्रमुख सांसदों को हिरासत में लिया गया। इनमें शामिल थे कांग्रेस के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे, शिवसेना (UBT) के संजय राउत, और टीएमसी की सागरिका घोष।
हाई-ड्रामा और राजनीतिक झलक
— विरोध के दौरान सांसद अखिलेश यादव बैरिकेड के ऊपर कूदते देखे गए—यह दृश्य प्रदर्शन की जुझारू भावना को दर्शाता है।
— TMC सांसद महुआ मोइत्रा और मिताली बाघ बेहोश भी हो गईं—जिस पर राहुल गांधी समेत कई नेता उनकी सहायता करते नजर आए।
— गिरफ्तार किए जाने पर राहुल गांधी ने कहा, “यह लड़ाई राजनीतिक नहीं, संविधान की रक्षा और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ की लड़ाई है।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया और संसद सत्र
— कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पुलिस और सरकार को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए सवाल उठाया कि सांसदों को चुनाव आयोग तक जाने की आज़ादी क्यों नहीं है।
— दूसरी ओर भाजपा ने विरोध प्रदर्शनों को ‘अराजकता फैलाने की कोशिश’ बताया और रिपोर्ट देने की मांग को अपरिपक्व और निराधार तक करार दिया।
— संसद की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई, क्योंकि विरोधियों ने हंगामा करते हुए सांसदों को कार्यवाही में भाग लेने से रोक दिया।
निष्कर्ष
यह विरोध मार्च केवल राजनीतिक एक्शन नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र के प्रति सवाल उठाने का सामूहिक प्रयास था। SIR के माध्यम से विपक्ष द्वारा अर्जित सवाल—चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता अधिकार, और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मर्यादा—देशभर में बहस को नए मुकाम पर ले गए हैं। आने वाले दिनों में इस घटना का सियासी और संवैधानिक असर देश के चुनावी डिज़ाइन और लोकतांत्रिक व्यवहार दोनों पर देखा जाएगा।
Author: THE CG NEWS
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