शाह बोले- विपक्ष जेल को CM-PM हाउस बनाना चाहता है:राहुल ने संसद में लालू को बचाने वाला अध्यादेश फाड़ा था, सरकार गई तो सुर बदले

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गृह मंत्री अमित शाह ने आज विपक्ष पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष देश में ऐसी परंपरा स्थापित करना चाहता है, जिसमें जेल से ही सरकार चलाई जाए। शाह ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र का स्तर इतना गिर जाएगा कि जेल ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास बन जाए। उन्होंने इस बहस को सीधे तौर पर संविधान (130वां संशोधन) विधेयक से जोड़ते हुए इसे लोकतांत्रिक नैतिकता और जवाबदेही के लिए जरूरी करार दिया।

संवैधानिक संशोधन और नैतिक राजनीति की बहस

संसद में हाल ही में पेश किया गया संविधान (130वां संशोधन) विधेयक कहता है कि यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर अपराध के आरोप में 30 दिन से अधिक जेल में रहे, तो उसे अपने पद से हटना होगा। शाह ने इस प्रावधान को लोकतंत्र की मर्यादा के लिए आवश्यक बताया। उनका कहना था कि अगर कोई शीर्ष पदाधिकारी जेल में बंद होकर भी सत्ता का इस्तेमाल करे तो यह लोकतंत्र और जनता दोनों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रहा है, जबकि यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा।

राहुल गांधी पर निशाना, 2013 का संदर्भ

अमित शाह ने इस बहस के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में जब मनमोहन सिंह सरकार ने दोषसिद्ध नेताओं को चुनाव लड़ने से राहत देने वाला अध्यादेश लाने की कोशिश की थी, तब राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से उस अध्यादेश की प्रति फाड़ दी थी। उस समय उन्हें नैतिकता का प्रतीक बताया गया था। शाह ने सवाल किया कि वही राहुल गांधी आज ऐसे नेताओं का समर्थन क्यों कर रहे हैं जो जेल से सरकार चलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नैतिकता चुनावी हार-जीत पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सूर्य-चंद्रमा की तरह स्थायी होनी चाहिए।

विपक्ष का पलटवार और संदेह

विपक्षी दलों ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल अपने विरोधी राज्यों और नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर सकती है। उनका तर्क है कि किसी नेता के खिलाफ झूठे मामलों में जेल भेजकर उसकी राजनीतिक भूमिका खत्म करने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं, शाह का कहना है कि अदालतें झूठे मामलों में बेल देने की ताकत रखती हैं, इसलिए विपक्ष का डर निराधार है।

लोकतंत्र की मर्यादा या राजनीति का हथियार?

अमित शाह के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। सत्ता पक्ष इस संशोधन को लोकतंत्र की गरिमा बचाने का प्रयास बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे केंद्र सरकार का नया हथियार करार दे रहा है। अब सवाल यही है कि यह संशोधन वास्तव में राजनीति में नैतिकता लाएगा या फिर विपक्ष के दावों के मुताबिक सत्ता का केंद्रीकरण और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बनाने का साधन बनेगा। आने वाले दिनों में संसद और सियासत दोनों ही इस मुद्दे पर और गरमाने वाली हैं।

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Author: THE CG NEWS

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