
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों की हड़ताल अब बड़े संकट का रूप ले चुकी है। रायपुर में 16,000 से अधिक कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है, जबकि दुर्ग जिले में 850 कर्मियों ने नौकरी छोड़ने का ऐलान किया है। वहीं, आंदोलन के बीच 25 NHM कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, जिनमें संगठन के प्रदेश संरक्षक और महासचिव भी शामिल हैं। पिछले 18 दिनों से चल रही हड़ताल ने प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।
हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था
NHM कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रदेश भर में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। अस्पतालों में नियमित टीकाकरण अभियान प्रभावित हुआ है, मातृ-शिशु देखभाल सेवाएं बाधित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और वार्ड बॉय जैसे फ्रंटलाइन कर्मचारी सेवाओं से दूर होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जिलों से खबरें हैं कि आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी स्वास्थ्य कार्य लगभग ठप हो चुके हैं।
सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव
कर्मचारियों की मुख्य मांग नियमितीकरण और स्थायी नौकरी की है। उनका कहना है कि वे वर्षों से अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं लेकिन उन्हें स्थायित्व और उचित वेतनमान नहीं मिल पा रहा। वहीं, सरकार ने अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। राज्य सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों की कुछ मांगें उचित हैं, लेकिन उन्हें चरणबद्ध तरीके से ही पूरा किया जा सकता है। इसके बावजूद कर्मचारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और हड़ताल वापस लेने से इनकार कर रहे हैं।
इस्तीफों ने बढ़ाया संकट
रायपुर और दुर्ग में बड़े पैमाने पर हुए इस्तीफों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सामूहिक इस्तीफे से साफ हो गया है कि कर्मचारी अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं, सरकार ने इस्तीफों को दबाव बनाने की रणनीति करार देते हुए सख्त रुख अपनाया है।
बर्खास्तगी पर विवाद
सरकार ने आंदोलन को असंवैधानिक और सेवा नियमों के खिलाफ बताते हुए 25 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इनमें NHM संगठन के प्रदेश संरक्षक और महासचिव जैसे वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया है। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि बर्खास्तगी वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
जनता पर असर
इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं की जांच और प्रसव सेवाएं प्रभावित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर खतरा बढ़ गया है। टीकाकरण के अभियान पर भी असर पड़ा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा है। कई जगहों पर मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है।
आगे की राह
फिलहाल यह टकराव थमता नजर नहीं आ रहा। सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत के कई दौर नाकाम हो चुके हैं। सरकार जहां सख्ती के साथ कर्मचारियों को काम पर लौटने का निर्देश दे रही है, वहीं कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का संकट और गहराने की आशंका है।
NHM कर्मचारियों की हड़ताल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना ठोस समाधान के स्थिति सामान्य होना मुश्किल है। अब सबकी निगाहें सरकार और संगठन के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं कब तक पटरी पर लौट पाएंगी।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं संकट में: 18 दिन से हड़ताल पर NHM कर्मचारी, 16 हजार ने दिया इस्तीफा और 25 बर्खास्त
Author: THE CG NEWS
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