टॉयलेट में फोन इस्तेमाल करने से बढ़ सकता है 4 गंभीर बीमारियों का खतरा

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आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठते ही लोग सबसे पहले फोन चेक करते हैं और दिनभर इसका इस्तेमाल करते रहते हैं। लेकिन एक आदत जो तेजी से आम होती जा रही है, वह है—टॉयलेट में बैठकर फोन चलाना। कई लोग इस समय को सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग, चैटिंग या वीडियो देखने में बिताते हैं। पर यह आदत सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हाल ही में हुई रिसर्च बताती है कि जो लोग टॉयलेट में फोन का अधिक इस्तेमाल करते हैं, उनमें पाइल्स और अन्य बीमारियों का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा बढ़ जाता है।

पाइल्स और एनल फिशर का खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि जब लोग फोन लेकर टॉयलेट में जाते हैं तो वे ज़रूरत से ज़्यादा समय तक सीट पर बैठे रहते हैं। सामान्यत: टॉयलेट का समय पांच मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन फोन की वजह से यह 15–20 मिनट तक खिंच जाता है। लंबे समय तक प्रेशर पड़ने से गुदा क्षेत्र की नसों में सूजन आ सकती है, जिससे पाइल्स या एनल फिशर जैसी तकलीफ़ें होने लगती हैं। शुरुआत में यह समस्या हल्की होती है, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

बैक्टीरिया का अड्डा बनता फोन

बाथरूम को हमेशा गंदगी और बैक्टीरिया का स्रोत माना जाता है। जब हम फोन को टॉयलेट में ले जाते हैं, तो उस पर अदृश्य बैक्टीरिया और कीटाणु चिपक जाते हैं। बाद में यही फोन हमारे चेहरे, कान और हाथों के संपर्क में आता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे फूड पॉइज़निंग, दस्त और पेट दर्द इसी कारण हो सकते हैं। यानी टॉयलेट में फोन इस्तेमाल करने की आदत आपकी इम्यूनिटी को कमजोर कर सकती है।

डोपामिन की लत और मानसिक असर

टॉयलेट में बैठकर लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग करने से दिमाग डोपामिन नामक केमिकल रिलीज करता है, जो अस्थायी सुख का अनुभव कराता है। धीरे-धीरे यह आदत लत का रूप ले लेती है और व्यक्ति टॉयलेट का समय फोन चलाने के लिए इस्तेमाल करने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि दिमाग को सामान्य गतिविधियों में मजा नहीं आता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। लंबे समय में यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।

खराब पोश्चर की समस्या

फोन इस्तेमाल करते समय लोग अक्सर गर्दन झुकाकर या रीढ़ को मोड़कर बैठते हैं। टॉयलेट में यह गलत पोश्चर और लंबे समय तक बैठना मांसपेशियों और हड्डियों पर दबाव डालता है। खासकर गर्दन और पीठ में दर्द की समस्या आम हो जाती है। ब्लड सर्कुलेशन भी प्रभावित होता है, जिससे सुन्नपन और अकड़न की शिकायत बढ़ सकती है। इस तरह टॉयलेट में फोन चलाने की आदत शरीर की संपूर्ण मुद्रा को प्रभावित करती है।

रिसर्च और डॉक्टरों की राय

नई रिसर्च के मुताबिक, टॉयलेट में फोन इस्तेमाल करने वालों में पाइल्स का खतरा करीब 46% ज्यादा पाया गया है। यही नहीं, यह आदत धीरे-धीरे पाचन समस्याओं और अन्य बीमारियों को भी जन्म दे सकती है। इंडियन स्माइल एंड यूरोलॉजी सेंटर के विशेषज्ञ डॉ. सतीश शुभ्रवत का कहना है कि लोग टॉयलेट को केवल प्राकृतिक क्रिया तक सीमित रखें। वहां फोन या अन्य गैजेट ले जाना पूरी तरह से बचना चाहिए।

समाधान और सावधानियां

टॉयलेट में फोन इस्तेमाल करने की आदत को छोड़ना सबसे पहला कदम है। इसके लिए शुरुआत में खुद को सीमित करने का अभ्यास करें और बाथरूम में फोन ले जाना बंद कर दें। दिनभर सोशल मीडिया का समय तय करें और ज़रूरत पड़ने पर स्क्रीन टाइम फीचर का इस्तेमाल करें। फोन पर बिताए गए समय को धीरे-धीरे कम करके आप इस आदत को आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

छोटी सी आदत, जैसे टॉयलेट में फोन स्क्रॉलिंग करना, शुरुआत में मामूली लग सकती है लेकिन इसके नतीजे लंबे समय में गंभीर हो सकते हैं। पाइल्स, संक्रमण, मानसिक तनाव और खराब पोश्चर जैसी समस्याओं से बचने के लिए ज़रूरी है कि हम इस आदत को तुरंत बदलें। याद रखें, सेहत सबसे कीमती है और उसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी भी।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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