
केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए GST 2.0 सुधार के बाद उपभोक्ताओं में उम्मीद जगी थी कि रोज़मर्रा की जरूरतों में शामिल दूध के दाम घटेंगे। हालांकि, अमूल ब्रांड का संचालन करने वाली गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) ने साफ कर दिया है कि पाउच दूध (ताज़ा दूध) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि उस पर पहले से ही जीरो प्रतिशत जीएसटी लागू है। केवल UHT दूध (Ultra High Temperature / लॉन्ग-लाइफ दूध) पर इसका असर पड़ेगा, क्योंकि अब उस पर लगने वाला 5% टैक्स पूरी तरह से हटा दिया गया है।
जीएसटी काउंसिल का बड़ा निर्णय
हाल ही में हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में कर ढांचे को सरल बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। खाद्य पदार्थों और डेयरी उत्पादों पर टैक्स को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बाद सरकार ने अब UHT दूध को टैक्स-मुक्त श्रेणी में शामिल कर दिया है। पहले इस पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जो अब शून्य हो गया है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलेगी और कंपनियों के लिए सप्लाई चैन भी सरल होगी।
अमूल ने क्यों किया साफ इनकार?
अमूल के प्रबंध निदेशक जयेन् मेहता ने मीडिया से कहा कि आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाला पाउच दूध पहले से ही टैक्स फ्री है, इसलिए इस बदलाव से उसकी कीमत में कोई गिरावट नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि “उपभोक्ताओं को यह समझना चाहिए कि पाउच दूध पर पहले से जीरो प्रतिशत टैक्स था, इसलिए कीमत घटने की खबरें सिर्फ अफवाह हैं। बदलाव का असर केवल उस दूध पर पड़ेगा जो टेट्रा पैक या लंबे समय तक स्टोर किए जा सकने वाले UHT दूध के रूप में बेचा जाता है।”
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
उपभोक्ताओं के लिहाज से देखा जाए तो पाउच दूध की कीमतें ज्यों की त्यों रहेंगी। रोज़ाना इस्तेमाल होने वाले इस दूध पर किसी तरह का नया टैक्स बोझ नहीं था, इसलिए किसी राहत की गुंजाइश भी नहीं है। हालांकि, जो लोग टेट्रा पैक या लॉन्ग-लाइफ दूध इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अब बचत का फायदा मिलेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि UHT दूध की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू होगा।
कीमतों पर असर सीमित क्यों रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमत घटने का असर सीधा और एक समान नहीं होगा। उत्पादन लागत, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और वितरण नेटवर्क पर खर्च कंपनियों की नीतियों को प्रभावित करते हैं। इसलिए टैक्स कम होने के बावजूद हर ब्रांड और हर शहर में कीमतें अलग-अलग घट सकती हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता पाउच दूध को ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि वह ताज़ा और किफायती होता है। ऐसे में UHT दूध की मांग में थोड़ा इजाफा जरूर हो सकता है, लेकिन पाउच दूध के बाजार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
डेयरी इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि जीएसटी सुधार का सीधा फायदा कंपनियों की सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को होगा। टैक्स बोझ घटने से कंपनियां लॉन्ग-लाइफ दूध को नए बाजारों तक पहुंचाने में ज्यादा सक्षम होंगी। इससे उन उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा जो महानगरों से दूर रहते हैं और जहां रोज़ाना ताज़ा दूध पहुंचाना संभव नहीं है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, सरकार के जीएसटी सुधार से आम जनता को यह समझना होगा कि पाउच दूध पहले से टैक्स-फ्री है और इसमें कोई कमी नहीं होगी। बदलाव का असर केवल UHT दूध पर पड़ेगा, जिससे इस श्रेणी के उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। अमूल की आधिकारिक घोषणा ने उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर कर दिया है और यह साफ कर दिया है कि रोज़ाना की दूध खरीद पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा।
Author: THE CG NEWS
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