
ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और पशुपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाजसेवी कुलदीप सिंह बन्छोर ने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा और समर्पण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। “मीरा के श्याम पर्यावरण महिला एवं बाल विकास संस्था” के माध्यम से उन्होंने न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नई दिशा दी है, बल्कि जैविक खेती, पशुपालन और पर्यावरण जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समाज के केंद्र में लाने का काम किया है। उनके नेतृत्व में संस्था के प्रयास बासीन और आसपास के कई गाँवों में प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं।
जैविक खेती से ग्रामीण स्वावलंबन
कुलदीप सिंह बन्छोर के मार्गदर्शन में बासीन और आसपास के लगभग 150 किसान परिवारों ने जैविक खेती अपनाई। उन्होंने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरक के बजाय जैविक उर्वरक और प्राकृतिक तरीकों से खेती करने से मिट्टी और पानी की गुणवत्ता बनी रहती है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसके परिणामस्वरूप ये किसान अब जैविक सब्जियां और अनाज उगा रहे हैं और अपने उत्पादों को स्थानीय बाजारों में बेचकर अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। एक किसान ने बताया, “जैविक खेती ने हमारी लागत कम की और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर बनाई। अब हम अपने खेतों से स्थायी आय कमा रहे हैं।”

हरे चारे और नस्ल सुधार से पशुपालन में सुधार
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन की सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण हरे चारे की कमी थी। कुलदीप सिंह बन्छोर ने हरे चारे के लिए विशेष बीज उपलब्ध कराए और किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से चारा उगाने का प्रशिक्षण दिया। इसके साथ ही, नस्ल सुधार कार्यक्रम भी लागू किए गए। इसका असर साफ दिखाई दिया – लगभग 120 पशुपालक परिवारों ने अब बेहतर दूध और गोबर उत्पादन शुरू किया, और उनकी आय में 30-35 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
गौमूत्र अर्क उत्पादन और आय के अवसर
कुलदीप सिंह बन्छोर द्वारा शुरू की गई पहल गौमूत्र अर्क का उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बढ़ाया गया। इसे स्थानीय बाजार में उपलब्ध कराने के साथ-साथ औषधीय और कृषि उपयोग में प्रचारित किया गया। इसके कारण बासीन और आस-पास के गाँवों के लगभग 50 परिवारों को प्रतिमाह 3,000 से 5,000 रुपये की अतिरिक्त आय मिलने लगी। एक किसान ने बताया, “गौमूत्र अर्क ने हमारी आय स्थिर की और नए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए।”


जैविक खाद और मिट्टी की उर्वरता
संस्था ने जैविक खाद उत्पादन को ग्रामीण विकास का अहम हिस्सा बनाया। बासीन और आसपास के 70 किसान परिवारों ने अब अपने खेतों में जैविक खाद का इस्तेमाल शुरू किया है। इससे फसल की गुणवत्ता बढ़ी और मिट्टी की उर्वरता बनी रही। किसानों का कहना है कि अब रासायनिक उर्वरक पर उनकी निर्भरता कम हो गई है।
गोवंश संरक्षण और स्वास्थ्य
कुलदीप सिंह बन्छोर ने गोवंश संरक्षण को प्राथमिकता दी। बासीन और आसपास के गाँवों में लगभग 200 गाय-बैल सुरक्षित हैं और उनका स्वास्थ्य बेहतर बना हुआ है। संस्था ने गौशालाओं का प्रबंधन, गोवंश के लिए आहार और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की हैं। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीणों की आय स्थिर हुई और पशुपालन लाभकारी व्यवसाय बन गया।
भविष्य की दिशा और ग्रामीण समाज पर असर
कुलदीप सिंह बन्छोर का दृष्टिकोण केवल वर्तमान कार्यों तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और पशुपालन की जागरूकता बढ़ाने से ही सतत विकास संभव है। उनके नेतृत्व में बासीन और आसपास के गाँवों के लोग नई परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
निष्कर्ष
कुलदीप सिंह बन्छोर ने यह साबित कर दिया है कि सही नेतृत्व और समर्पण से ग्रामीण समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। मीरा के श्याम पर्यावरण महिला एवं बाल विकास संस्था के माध्यम से बासीन और आस-पास के गाँवों में ग्रामीण विकास, जैविक खेती, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है। उनकी प्रेरणा स्थानीय समुदाय के लिए नई दिशा तय कर रही है और यह साबित कर रही है कि अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो समाज में स्थायी परिवर्तन संभव है।
Author: THE CG NEWS
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