
धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दीपावली महापर्व की शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व विशेष रूप से समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन की गई खरीदारी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार भी यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। आइए जानते हैं धनतेरस 2025 में क्या खरीदना चाहिए और किन वस्तुओं से बचना चाहिए।
✅ शुभ वस्तुएं: जो खरीदनी चाहिए
सोना और चांदी
सोना और चांदी की वस्तुएं जैसे सिक्के, आभूषण या बर्तन खरीदना शुभ होता है। माना जाता है कि देवी लक्ष्मी इन धातुओं में वास करती हैं, और इन्हें घर में लाने से समृद्धि आती है।
पीतल, तांबा और स्टेनलेस स्टील के बर्तन
इन धातुओं के बर्तन खरीदने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।
झाड़ू (झाडू)
झाड़ू को घर में नकारात्मकता और दरिद्रता को दूर करने के लिए खरीदा जाता है। यह देवी लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है।
गौमती चक्र
गौमती चक्र को घर में रखने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है। यह देवी लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक है।
इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं
यदि आप फोन, टीवी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो धनतेरस का दिन इसके लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन की गई खरीदारी से आर्थिक प्रगति होती है।
❌ अशुभ वस्तुएं: जिनसे बचना चाहिए
लोहे की वस्तुएं
वास्तु शास्त्र के अनुसार, धनतेरस के दिन लोहे की चीज़ें खरीदना अशुभ माना जाता है। लोहे से जुड़ी वस्तुएं घर में नकारात्मक ऊर्जा ला सकती हैं।
कांच की वस्तुएं
कांच या शीशे की सजावटी या उपयोग की वस्तुओं को इस दिन खरीदना शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि ये टूटने की आशंका बढ़ाते हैं और सौभाग्य में बाधा ला सकते हैं।
नुकीली वस्तुएं
चाकू, कैंची या अन्य धारदार वस्तुओं को धनतेरस पर न खरीदने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि ये पारिवारिक संबंधों में कलह और बाधा ला सकती हैं।
प्लास्टिक की वस्तुएं
आधुनिक समय में प्लास्टिक उत्पादों की खरीदारी भी इस दिन से बचने योग्य मानी जाती है क्योंकि वह स्थायित्व, ऊर्जा और शुद्धता को प्रभावित कर सकती हैं।
काले रंग की वस्तुएं
काले रंग की चीजें, जैसे कपड़े या सजावटी सामान, धनतेरस पर नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है, इसलिए इन्हें खरीदने से परहेज़ करना चाहिए।
🕉️ धार्मिक महत्व और मान्यताएँ
धनतेरस का पर्व समुद्र मंथन से जुड़ी एक पौराणिक कथा से उत्पन्न हुआ है। इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे, और उनके साथ आभूषण और बहुमूल्य रत्न भी समुद्र मंथन से प्राप्त हुए थे। इस कारण इस दिन आभूषणों की खरीदारी विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
इस दिन लोग दीप जलाते हैं और यमदीपम का पूजन करते हैं ताकि यमराज से परिवार की रक्षा हो सके। साथ ही, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है ताकि घर में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे।
📅 धनतेरस 2025 की तिथि और मुहूर्त
धनतेरस 2025 का पर्व शनिवार, 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे से प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर को 1:51 बजे तक रहेगी। इस दिन का सबसे शुभ समय रात्रि 7:16 बजे से 8:20 बजे तक है, जब देवी लक्ष्मी की पूजा और दीप जलाना अत्यंत फलदायक माना जाता है।
निष्कर्ष
धनतेरस का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि हमारी खरीदारी से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन की गई खरीदारी से घर में समृद्धि, सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। अतः इस धनतेरस पर शुभ वस्तुओं की खरीदारी करें और अशुभ वस्तुओं से बचें, ताकि आपके घर में लक्ष्मी का वास हो और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो।
Author: THE CG NEWS
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