गोवर्धन पूजा 2025: अन्नकूट महोत्सव आज धूमधाम से मनाया जाएगा, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व

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दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में गोवर्धन पूजा 23 अक्टूबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अन्नकूट के रूप में की जाती है, जिसमें विविध प्रकार के व्यंजन बनाकर अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु इस पर्व को प्रकृति, गोवर्धन पर्वत और गायों के प्रति आभार व्यक्त करने के रूप में भी मानते हैं। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार, बनारस और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

पंडितों के अनुसार, इस बार गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 23 अक्टूबर को सुबह 6:28 बजे से लेकर 8:44 बजे तक रहेगा। यह समय पूजा, अन्नकूट अर्पण और गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जिन लोगों ने दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन किया है, वे अगली सुबह स्नान कर इस पूजा को अन्नकूट पर्व के रूप में संपन्न करते हैं। कई जगहों पर ब्रज परंपरा के अनुसार लोग गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाते हैं और उसकी पूजा करते हैं।

पौराणिक कथा और गोवर्धन पर्व का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने देखा कि लोग इंद्र देव की पूजा कर वर्षा की अपेक्षा कर रहे हैं, तो उन्होंने उन्हें समझाया कि असली पालनकर्ता गोवर्धन पर्वत है, जो उन्हें जल, अन्न और चारागाह प्रदान करता है। श्रीकृष्ण ने स्वयं गोवर्धन पर्वत की पूजा की और सभी ग्रामीणों को ऐसा करने की प्रेरणा दी। इससे इंद्र देव क्रोधित हो गए और उन्होंने मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर समूचे गांव की रक्षा की। इसी घटना की याद में हर वर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है।

अन्नकूट महोत्सव की परंपरा

गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट का विशेष आयोजन किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन जैसे पूड़ी, खीर, सब्जियां, मिठाइयाँ और पकवान बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं। मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में इस अवसर पर सैकड़ों प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। बाद में यह प्रसाद भक्तों में वितरित किया जाता है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग, भिलाई और रायपुर जैसे शहरों में भी इस दिन मंदिरों में विशेष आरती और अन्नकूट भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

गौ-सेवा और गोवर्धन पूजा का संबंध

गोवर्धन पूजा को गौ-पूजा का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन गायों को स्नान कराकर उन्हें सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। ग्रामीण इलाकों में किसान गायों को हरी घास, गुड़ और रोटी खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य का जीवन प्रकृति और पशुधन से गहराई से जुड़ा हुआ है।

समाज में एकता और सेवा का संदेश

गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता, सहयोग और प्रकृति के संरक्षण का भी संदेश देता है। अन्नकूट प्रसाद वितरण से सामाजिक समानता का भाव बढ़ता है और सामूहिक सेवा की भावना मजबूत होती है।

निष्कर्ष

गोवर्धन पूजा भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता और संरक्षण का प्रतीक है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों, पशुधन और पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए। इस वर्ष भी श्रद्धालु पूरे हर्षोल्लास के साथ भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी भक्ति अर्पित करेंगे और अन्नकूट महोत्सव के माध्यम से गोवर्धन पर्व का स्मरण करेंगे।

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Author: THE CG NEWS

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