43 लाख छात्रों की डिग्रियां डिजिलॉकर में अपलोड नहीं: रिकॉर्ड और क्रेडिट अंक देखने में असमर्थ विद्यार्थी

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छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग की डिजिटल पहल ‘डिजिलॉकर’ फिलहाल छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ रहे लगभग 55 लाख विद्यार्थियों में से अब तक केवल 12 लाख की डिग्रियां ही डिजिलॉकर में अपलोड की जा सकी हैं, जबकि शेष 43 लाख छात्रों के रिकॉर्ड अब तक लंबित हैं। इससे छात्रों को अपने अंक, प्रमाणपत्र और क्रेडिट अंक देखने में दिक्कत हो रही है।

एबीसी अकाउंट बने, लेकिन अपलोड में लापरवाही

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत हर छात्र के लिए अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) अकाउंट बनाना अनिवार्य किया गया था, ताकि उसके सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर डिजिटल रूप में सुरक्षित रह सकें। राज्य में लगभग 4.50 लाख छात्रों का एबीसी अकाउंट बनाया जा चुका है, परंतु उनकी डिग्रियां अब तक डिजिलॉकर पर अपलोड नहीं की गई हैं।

इस स्थिति से विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर के बाद आगे की पढ़ाई या नौकरी के लिए आवेदन में कठिनाई आ रही है। कई छात्रों ने शिकायत की है कि उनके डिजिलॉकर खातों में लॉगिन करने पर क्रेडिट अंक, अंकसूची या डिग्री की कोई जानकारी नहीं मिलती।

विश्वविद्यालयों की लापरवाही से बढ़ी मुश्किलें

उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद अधिकांश विश्वविद्यालय और कॉलेज डिजिलॉकर पर छात्रों के रिकॉर्ड अपलोड करने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। विभाग ने बताया कि अब तक केवल 12 लाख डिग्रियां ही डिजिलॉकर पर डाली जा सकी हैं, जबकि 43 लाख छात्रों का डेटा अपलोड होने में देरी हो रही है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, कई कॉलेजों में बार-बार नोडल अधिकारी बदले जाने से डेटा एंट्री का काम अधूरा रह जाता है। इसके अलावा, तकनीकी दिक्कतें और धीमी इंटरनेट प्रक्रिया भी अपलोड कार्य में बाधा डाल रही हैं।

छात्रों को नहीं मिल पा रहे डिजिटल प्रमाणपत्र

डिजिलॉकर का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना है। इसके तहत अंकसूची, प्रमाणपत्र, उपाधि और पुरस्कार जैसी जानकारी ऑनलाइन सुरक्षित रखी जानी है। लेकिन अपलोड प्रक्रिया अधूरी होने से अधिकांश छात्रों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।

कई छात्रों ने बताया कि डिजिलॉकर पर उनके प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड उपलब्ध न होने से उन्हें विदेशों में प्रवेश और सरकारी नौकरी के लिए आवेदन में मुश्किल हो रही है। विश्वविद्यालयों की धीमी गति से छात्र नाराज हैं और कई जगह शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं।

कॉलेजों को दी गई 40 दिन की अंतिम समय सीमा

उच्च शिक्षा विभाग ने अब सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि अगले 40 दिनों के भीतर शेष सभी छात्रों की डिग्रियां और रिकॉर्ड डिजिलॉकर पर अपलोड किए जाएं। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि तय समय में कार्य पूरा न करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विभाग का कहना है कि डिजिलॉकर और एबीसी अकाउंट से विद्यार्थियों को भविष्य में अत्यधिक लाभ मिलेगा। छात्र किसी भी संस्था या सरकारी नौकरी के आवेदन में अपने डिजिटल प्रमाणपत्र सीधे प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे दस्तावेज़ों की सत्यापन प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।

सरकार का दावाजल्द पूरी होगी प्रक्रिया

राज्य सरकार का दावा है कि अगले चरण में डिजिलॉकर और विश्वविद्यालयों के बीच तकनीकी समन्वय को बेहतर बनाया जाएगा ताकि अपलोड की गति बढ़ाई जा सके। उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सभी विश्वविद्यालयों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सभी विद्यार्थियों के रिकॉर्ड डिजिलॉकर पर अपलोड हो जाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल प्राथमिकता उन छात्रों को दी जा रही है जिन्होंने अपनी डिग्रियों के लिए आवेदन किया है। आगे चलकर सभी विद्यार्थियों के रिकॉर्ड चरणबद्ध तरीके से जोड़े जाएंगे।

निष्कर्ष

डिजिलॉकर जैसी डिजिटल पहल का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाना है, परंतु छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड अपलोड में हो रही देरी से यह पहल अधूरी साबित हो रही है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी यह समस्या अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है। यदि विभाग और विश्वविद्यालय समय पर समन्वय नहीं बना पाए, तो विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और रोजगार में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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