सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों से आवारा कुत्ते हटाएं; हाईवे से जानवरों को हटाने के भी निर्देश, नसबंदी के बाद वापस छोड़ने पर रोक

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देश में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के हमलों और सड़कों पर भटकते पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा आदेश जारी करते हुए कहा कि देशभर के सभी स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और बस स्टैंड परिसरों से आवारा कुत्तों को तत्काल हटाया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि पकड़े गए कुत्तों को उसी जगह वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था, बल्कि उन्हें सुरक्षित शेल्टर होम में रखा जाएगा।

स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों में लगाई जाए बाड़

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करें कि स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के परिसरों में कुत्ते या अन्य आवारा जानवर प्रवेश न कर सकें। इसके लिए परिसरों के चारों ओर मजबूत बाड़ लगाई जाए और उसकी नियमित देखभाल के लिए जिम्मेदार नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए। कोर्ट ने नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों को आदेश दिया कि वे हर तीन महीने में इन परिसरों का निरीक्षण करें और स्थिति की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपें।

हाईवे से भी हटाए जाएंगे आवारा पशु

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कहा कि सड़कों पर घूमते आवारा पशु हटाए जाएं। इसके लिए प्रत्येक राज्य को हेल्पलाइन नंबर जारी करने का निर्देश दिया गया है, ताकि नागरिक हाईवे पर पशुओं की मौजूदगी की जानकारी दे सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं और मानव जीवन के खतरे को रोकना राज्यों की जिम्मेदारी है, और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला अब पूरे देश में लागू

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा तीन महीने पहले दिए गए आदेश को पूरे देश में लागू किया जाएगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की सभी एजेंसियों को सड़कों से आवारा जानवरों को हटाने के निर्देश दिए थे और कार्रवाई में बाधा डालने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश भी दिए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को पूरे भारत के लिए मान्य कर दिया है, ताकि सभी राज्य एक समान नीति के तहत काम करें।

सभी राज्यों से तीन हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट मांगी

कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया कि वे इन निर्देशों के पालन की स्थिति पर तीन हफ्ते के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा कोर्ट में जमा करें। अदालत ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी राज्य ने इन आदेशों के पालन में लापरवाही दिखाई, तो उसके मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी।

याचिकाकर्ताओं ने आदेश को बताया कठोर

इस मामले में याचिका दायर करने वालों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह आदेश अत्यधिक कठोर है और इससे पशु संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं की मुश्किलें बढ़ेंगी। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों को पूरी तरह से शेल्टर में बंद रखना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि कई इलाकों में इतने शेल्टर होम उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकारों को पशु कल्याण के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा

मामले की शुरुआत दिल्ली में बढ़ते डॉग बाइट मामलों से हुई

दरअसल, यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू किया था। रिपोर्ट में दिल्ली और एनसीआर क्षेत्रों में बच्चों व बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज संक्रमण के बढ़ते मामलों की जानकारी दी गई थी। बाद में कोर्ट ने इस मुद्दे का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया और सभी राज्य सरकारों से इस पर ठोस कार्रवाई की योजना मांगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिए थे दिशा-निर्देश

कोर्ट ने 3 नवंबर को भी इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि सरकारी परिसरों में कुत्तों को खाना खिलाने के लिए एक व्यवस्थित नियम बनाया जाएगा। उस दौरान कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से राहत दी थी, लेकिन साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि हलफनामा अधूरा या असत्य पाया गया, तो संबंधित अधिकारी को खुद अदालत में पेश होना पड़ेगा।

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। देश में हर साल हजारों लोग कुत्तों और अन्य आवारा पशुओं के हमलों के शिकार होते हैं। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि यह आदेश न केवल सड़क हादसों और डॉग बाइट घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि शहरों और गांवों दोनों में सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

अंत में सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि “सहानुभूति का अर्थ यह नहीं है कि नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डाला जाए।”

अब सभी राज्यों पर यह जिम्मेदारी है कि वे कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें और देशभर में सुरक्षित, स्वच्छ और पशुमुक्त सार्वजनिक स्थलों का निर्माण करें।

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Author: THE CG NEWS

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