
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के सातवें दिन उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने की खबर सामने आई। गुरुवार को यूपी-हरियाणा बॉर्डर के पास चलते समय उन्हें चक्कर आया और वे सड़क पर बेहोश होकर गिर गए। आसपास मौजूद भक्तों ने उन्हें तुरंत संभाला और गमछे से हवा दी, कुछ देर लेटे रहने के बाद वे उठकर बैठे तथा अचार-पराठा खाना खाकर फिर यात्रा जारी रखी। इस घटना के बाद पदयात्रा के आयोजक एवं सुरक्षा अधिकारियों ने उनके स्वास्थ्य पर निगरानी तेज कर दी है।
यात्रा का हाल और सुरक्षा इंतजाम
धीरेंद्र शास्त्री की यह पदयात्रा 7 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर इलाके से शुरू हुई थी और 16 नवंबर को वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर पर समाप्त होगी। यात्रा के मार्ग में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई जिले शामिल हैं और कोलकाता तक के धार्मिक मार्ग के बजाय यह पदयात्रा ब्रज क्षेत्र में संपन्न होगी। मथुरा में करीब 55 किलोमीटर की यात्रा चार दिनों में पूरी की जानी है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखे गए हैं; यहां पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एएसपी अनुज चौधरी भी मोर्चे पर तैनात बताये गए हैं।
होडल में दिए गए विवादित बयान
यात्रा के दौरान होडल (हरियाणा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने दिल्ली धमाके को आतंकवादी हमला करार देते हुए कहा कि यह हमला उनकी पदयात्रा को लक्ष्य कर हिंदुओं को डराने की कोशिश थी। उन्होंने धार्मिक शिक्षा और मदरसों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “मौलवी मदरसा में बच्चों को डॉ. कलाम बनाएं, डॉ. मुल्ला नहीं” और चेतावनी देते हुए कहा—यदि मौलवियां बच्चों को कट्टर शिखा देंगी तो “पूरी कौम को दिक्कत होगी।” उनके इस भाषण के अंश सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में काफी वायरल हुए हैं।
बयान पर प्रतिक्रियाएँ और सियासी विवाद
धीरेंद्र शास्त्री के भाषण और धार्मिक-सम्बंधी टिप्पणियों ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर दी हैं। कुछ समर्थन में आए तो कई नागरिकों, धार्मिक संगठनों और विपक्षी नेताओं ने उनके कटु स्वर और समुदाय विशेष के प्रति टिप्पणी पर चिंता जताई। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी दिखा कि पदयात्रा में कुछ मुस्लिम नागरिकों ने भी भाग लेकर समर्थन जताया, जिससे इस यात्रा की जटिल सामाजिक-राजनीतिक तस्वीर और बढ़ गई है। इस सब के बीच प्रशासन ने यह भरोसा दिलाया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा।
स्वास्थ्य और आगे की योजना
स्थानीय आयोजकों के अनुसार धीरेंद्र शास्त्री को बुधवार को भी बुखार आया था और उस समय डॉक्टरों ने उनका परीक्षण कर दवा दी थी; गुरुवार की घटना के बाद उन्हें कुछ देर आराम करने के लिए कहा गया पर उन्होंने फिर यात्रा जारी रखने का फैसला किया। आयोजकों ने बताया कि उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सुरक्षा-प्रशासन ने भी कहा है कि पदयात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असामाजिक या उकसाने वाली गतिविधि की सख्त नजर रखी जाएगी।
निष्कर्ष — धार्मिक अभियान और संवेदनशीलता का संतुलन
बागेश्वर धाम की यह सनातन एकता पदयात्रा धार्मिक उत्साह और सामाजिक संपर्क का माध्यम मानी जा रही है, लेकिन पदयात्रा के दौरान उठे विवादास्पद बयान और स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं ने उसके जनसमर्थन और सार्वजनिक आडिट दोनों को चुनौती दी है। जहां आयोजनकर्ता इसे ‘‘वैचारिक संग्राम’’ और देशभक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों और समाज के संवेदनशील तबकों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर समुदाय–विशेष के बारे में विवादास्पद टिप्पणी संवेदनशील माहौल बिगाड़ सकती है तथा सामाजिक समरसता के लिए खतरा बन सकती है। प्रशासन, आयोजक और धार्मिक मार्गदर्शक इस संतुलन को बनाए रखने के लिए सयुंक्त जिम्मेदारी निभाने पर मजबूर हैं।
Author: THE CG NEWS
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