रूस-भारत रक्षा सहयोग को नई मजबूती: स्टेट डूमा में आज RELOS समझौते पर वोटिंग, पुतिन के दौरे से पहले बढ़ेगी रणनीतिक साझेदारी

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भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को एक नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण क्षण आज बनने जा रहा है। रूस की संसद के निचले सदन स्टेट डूमा में भारत के साथ रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (RELOS) को मंजूरी देने पर वोटिंग होगी। यह वही समझौता है जिस पर इस साल फरवरी में हस्ताक्षर हुए थे और अब राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के भारत दौरे से पहले इसकी आधिकारिक मंजूरी तय मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच दशकों पुराने रक्षा और सैन्य संबंधों को यह समझौता और भी अधिक मजबूत करेगा, क्योंकि इसके तहत दोनों सेनाएं एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगी, जिससे संयुक्त अभियानों, अभ्यासों और सहायता कार्यों में समन्वय और गति आएगी।

RELOS को एक ऐसा रक्षा ढांचा माना जा रहा है, जो भारत-रूस रक्षा साझेदारी को आधुनिक वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालेगा। फरवरी में मॉस्को में भारतीय राजदूत विनय कुमार और रूसी उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। इसे रूस की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संसद की मंजूरी मिलना आवश्यक है और इसी वजह से आज स्टेट डूमा में इस पर बहस और वोटिंग रखी गई है। पुतिन के भारत दौरे से पहले इसे पारित करने का उद्देश्य यह स्पष्ट करता है कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कितने गंभीर और प्रतिबद्ध हैं।

क्या है RELOS और क्यों है यह इतना अहम

RELOS एक लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संसाधनों, सुविधाओं और सहयोग की उपलब्धता को आसान और त्वरित बनाना है। इसके तहत भारत और रूस की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, बंदरगाहों, सप्लाई पॉइंट्स और एयरफील्ड्स का उपयोग ईंधन भरने, मरम्मत, स्टॉक रिफिल, मेडिकल सपोर्ट, ट्रांजिट और मूवमेंट जैसे कामों के लिए कर सकेंगी। यह सुविधा किसी भी सैन्य अभियान और आपदा राहत जैसे अभियानों में समय और संसाधनों की बचत करेगी और दोनों देशों की कार्रवाई क्षमता को बढ़ाएगी।

भारत पहले ही अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ इसी तरह के लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौते कर चुका है। अब रूस के साथ ऐसा समझौता होना भारत की रक्षा कूटनीति में एक और महत्वपूर्ण जुड़ाव जोड़ता है। रूस दशकों से भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है और RELOS दोनों देशों के बीच सामरिक विश्वास को और गहरा करेगा।

रूस अभी इसे मंजूरी क्यों दे रहा है

राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का भारत दौरा इसी सप्ताह होने वाला है। दोनों देशों के बीच सालाना शिखर बैठक में रक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेगा। रूस यह संदेश देना चाहता है कि वह रक्षा सहयोग के हर पहलू में भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। इसी वजह से RELOS को मंजूरी देने की प्रक्रिया को पुतिन के दौरे से पहले तेज किया गया है। इस समझौते की स्वीकृति दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सामंजस्य को प्रदर्शित करेगी और आगे की वार्ताओं को गति देगी।

पुतिन के दौरे में डिफेंस एजेंडा सबसे आगे

पुतिन के भारत दौरे के दौरान रक्षा सहयोग पर सबसे ज्यादा फोकस रहने वाला है। रूस पहले ही संकेत दे चुका है कि वह भारत को अपना उन्नत SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने के लिए तैयार है। यह रूस का सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो भारत की वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारत वर्तमान में अपने फाइटर जेट बेड़े को मजबूत करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहा है, और ऐसे में SU-57 एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव हो सकता है।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच S-500 मिसाइल सिस्टम पर भविष्य में सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल के अगले वर्जन के विकास और नौसेनाओं के लिए संयुक्त रूप से वॉरशिप बनाने को लेकर भी चर्चा की उम्मीद है। यह सहयोग भारत की सुरक्षा क्षमताओं को नए आयाम देगा।

S-400 मिसाइल सिस्टम की नई खेप पर भी हो सकती है बातचीत

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त यूनिटों की खरीद पर भी बातचीत कर सकता है। यह सिस्टम हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अत्यंत प्रभावी साबित हुआ है। पहले से की गई पांच यूनिट की डील में से तीन भारत को मिल चुकी हैं, जबकि चौथे की डिलीवरी रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण विलंबित है। S-400 दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है, जो फाइटर जेट, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को भी एक बड़ी दूरी से निशाना बना सकता है।

कुल मिलाकर, RELOS समझौते पर आज होने वाली वोटिंग भारतरूस संबंधों के लिए निर्णायक क्षण हो सकती है। यह न केवल रक्षा सहयोग के नए द्वार खोलेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों की वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगी।

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Author: THE CG NEWS

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