
उत्तर प्रदेश भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी का नाम लगभग फाइनल माना जा रहा है। आधिकारिक ऐलान बाकी है, लेकिन तैयारियां उनके नाम की तरफ साफ इशारा कर रही हैं। शनिवार सुबह वे लखनऊ पहुंचेंगे और पार्टी अध्यक्ष के चुनाव को भाजपा एक मेगा इवेंट के रूप में पेश करने जा रही है।
पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय से आते हैं, जो यूपी के OBC समीकरण में बड़ा और प्रभावशाली वर्ग माना जाता है। भाजपा पहले ही तय कर चुकी है कि नया प्रदेश अध्यक्ष OBC वर्ग से ही होगा। पंकज चौधरी 2021 से मोदी सरकार में मंत्री हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद भरोसेमंद नेता माने जाते हैं। इसका संकेत 2023 के गोरखपुर दौरे के दौरान तब मिला था जब प्रधानमंत्री अचानक उनके घर पहुंच गए थे।
चुनाव की तैयारियां पूरी, लखनऊ में जुटेंगे हजारों कार्यकर्ता
प्रदेश अध्यक्ष का नामांकन भाजपा मुख्यालय पर होगा, जबकि चुनाव की प्रक्रिया लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में पूरी की जाएगी। शनिवार को नामांकन की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को दी गई है और 14 दिसंबर को चुनाव के कार्यक्रम की ज़िम्मेदारी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक संभालेंगे।
यह चुनाव पार्टी के लिए सिर्फ औपचारिकता माना जा रहा है। करीब दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के मौजूद रहने की संभावना है। सभी विधायक, सांसद, प्रांतीय परिषद सदस्य, जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी और प्रदेश पदाधिकारी चुनाव स्थल पर मौजूद रहेंगे। भाजपा ने 8 प्रस्तावक भी तय कर दिए हैं, जिनमें कानपुर के MLC अरुण पाठक भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे और सीएम योगी आदित्यनाथ को तय नाम की जानकारी दी। चुनाव प्रभारी महेंद्रनाथ पांडेय भी देर रात लखनऊ पहुंच रहे हैं, जो शनिवार को संभावित उम्मीदवार को नामांकन पत्र सौंपेंगे। नामांकन पत्र राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े और चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल को सौंपा जाएगा।
क्यों पंकज चौधरी सबसे मजबूत दावेदार?
कुर्मी समाज यूपी के सामाजिक समीकरणों में निर्णायक भूमिका रखता है। यादवों के बाद सबसे बड़ी OBC आबादी कुर्मी समाज की है। 2024 चुनाव में इस समाज का बड़ा हिस्सा सपा के PDA फॉर्मूले की ओर झुका, लेकिन भाजपा इसे फिर से अपने पक्ष में मजबूती से साधना चाहती है।
पंकज चौधरी की छवि एक संगठनात्मक रूप से मजबूत, शांत स्वभाव और अनुभवी नेता की है। वह पार्षद रहे, गोरखपुर के डिप्टी मेयर बने और 1991 में पहली बार संसद पहुंचे। वर्तमान में वे राहत रूह तेल कंपनी के मालिक भी हैं। यूपी में इससे पहले भी भाजपा ने तीन बार कुर्मी जाति से प्रदेश अध्यक्ष बनाए—विनय कटियार, स्वतंत्र देव सिंह और ओम प्रकाश सिंह। यदि चौधरी का नाम फाइनल होता है तो वे चौथे कुर्मी अध्यक्ष होंगे।
गोरखपुर की राजनीति में योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी समानांतर क्षत्रप माने जाते हैं। ऐसे में एक को सरकार और दूसरे को संगठन की कमान देकर भाजपा संतुलन साधने की भी कोशिश कर रही है।
दो और नाम चर्चा में—बी.एल. वर्मा और साध्वी निरंजन ज्योति
हालांकि पंकज चौधरी का नाम सबसे आगे है, लेकिन दो और नामों की चर्चा बनी हुई है—
1. बीएल वर्मा: लोधी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसकी आबादी करीब 1.20 करोड़ है। कल्याण सिंह के बाद इस समाज का भाजपा में कोई बड़ा चेहरा नहीं रहा।
2. साध्वी निरंजन ज्योति: निषाद समाज में पकड़ मजबूत करने और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए भाजपा उन्हें भी विचार में रख सकती है।
इसके अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह, बाबूराम निषाद सहित कई अन्य नामों पर भी चर्चा है, हालांकि इनकी संभावना कम मानी जा रही है।
मतदान की संभावना कम, चुनाव निर्विरोध होने की तैयारी
पार्टी सूत्रों का मानना है कि मतदान की नौबत नहीं आएगी क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कम से कम 10 सदस्यों का समर्थन चाहिए और पार्टी के तय नाम के खिलाफ कोई नेता न तो नामांकन करेगा और न ही समर्थन जुटा पाएगा। इसलिए यह चुनाव पूरी तरह निर्विरोध होने की संभावना है।
84 संगठनात्मक जिलों के 380 से अधिक प्रांतीय परिषद सदस्य वोटिंग की स्थिति में मतदान करेंगे। रविवार दोपहर तक नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित हो सकता है।
अध्यक्ष के बाद योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार भी तय
प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद योगी सरकार 2.0 में दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार भी लगभग तय है। अभी सरकार में 6 मंत्री पद खाली हैं। सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
भूपेंद्र सिंह चौधरी को दोबारा मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है, जबकि कुछ मंत्रियों को प्रदर्शन के आधार पर बाहर भी किया जा सकता है। चुनावी साल से पहले भाजपा संतुलन साधने और संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
उत्तर प्रदेश भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की यह प्रक्रिया न सिर्फ संगठन की दिशा तय करेगी, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव और राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका व्यापक असर दिखेगा।
Author: THE CG NEWS
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