दिसंबर में GST कलेक्शन 6.1% बढ़कर ₹1.74 लाख करोड़ पार, टैक्स कटौती के बाद भी रेवेन्यू में मजबूती

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दिसंबर 2025 में देश के वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन ने मजबूती दिखाते हुए 6.1% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है। 1 जनवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में कुल GST कलेक्शन ₹1.74 लाख करोड़ से अधिक रहा, जबकि दिसंबर 2024 में यह ₹1.64 लाख करोड़ था। खास बात यह है कि सितंबर 2025 में कई वस्तुओं पर टैक्स दरों में कटौती किए जाने के बावजूद सरकार के टैक्स रेवेन्यू में यह उछाल देखने को मिला है। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियों और टैक्स अनुपालन में सुधार बना हुआ है।

इंपोर्ट से टैक्स कमाई में तेज उछाल

दिसंबर के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि GST कलेक्शन को सबसे बड़ा सहारा आयात यानी इंपोर्ट से मिला। विदेशी सामानों के आयात से होने वाली टैक्स कमाई सालाना आधार पर 19.7% बढ़ी है। दिसंबर 2025 में इंपोर्ट से कुल ₹51,977 करोड़ का GST कलेक्शन हुआ। यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार गतिविधियों में तेजी आई है और आयात पर लगने वाले टैक्स से सरकार को मजबूत रेवेन्यू मिला है। इसके उलट घरेलू लेनदेन से मिलने वाला GST अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ा।

घरेलू ट्रांजैक्शन में सुस्त ग्रोथ

घरेलू स्तर पर GST कलेक्शन की ग्रोथ सिर्फ 1.2% रही और यह बढ़कर करीब ₹1.22 लाख करोड़ तक पहुंची। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह सितंबर 2025 में की गई टैक्स कटौती है। सरकार ने उस समय करीब 375 वस्तुओं पर GST दरों में कमी की थी। इसका उद्देश्य महंगाई पर काबू पाना और घरेलू खपत को बढ़ावा देना था। हालांकि टैक्स दरों में कटौती से शॉर्ट टर्म में रेवेन्यू ग्रोथ पर असर पड़ा है, लेकिन सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय में खपत और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी होगी।

टैक्स रिफंड में 31% की बढ़ोतरी

दिसंबर 2025 में टैक्स रिफंड में भी तेज उछाल देखने को मिला। इस महीने कुल रिफंड 31% बढ़कर ₹28,980 करोड़ रहा। अगर कुल GST कलेक्शन में से रिफंड घटा दिया जाए, तो सरकार का नेट GST रेवेन्यू ₹1.45 लाख करोड़ के करीब रहा। रिफंड में बढ़ोतरी का मतलब यह भी है कि निर्यातकों और अन्य योग्य टैक्सपेयर्स को समय पर रिफंड मिल रहा है, जिससे कारोबारियों की नकदी स्थिति में सुधार होता है।

सेस कलेक्शन में बड़ी गिरावट

दिसंबर 2025 में सेस कलेक्शन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इस महीने सेस से सिर्फ ₹4,238 करोड़ की कमाई हुई, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा ₹12,003 करोड़ था। सेस कलेक्शन में आई इस कमी की मुख्य वजह 22 सितंबर 2025 से लागू किए गए नए नियम हैं। इन नियमों के तहत अब सेस केवल तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर लगाया जा रहा है। पहले सेस लग्जरी और तथाकथित ‘सिन गुड्स’ पर भी लगता था, जिनमें महंगी कारें और सॉफ्ट ड्रिंक्स शामिल थे। नियमों में बदलाव से सरकार की सेस कमाई स्वाभाविक रूप से घट गई है।

टैक्स कटौती का असर और सरकार की रणनीति

घरेलू GST रेवेन्यू की धीमी रफ्तार को सरकार टैक्स कटौती का अस्थायी असर मान रही है। सितंबर में की गई टैक्स दरों में कटौती का उद्देश्य मांग बढ़ाना और आम उपभोक्ताओं को राहत देना था। नीति-निर्माताओं का मानना है कि कम टैक्स दरों से बिक्री का वॉल्यूम बढ़ेगा, जिससे आने वाले महीनों में GST कलेक्शन को दोबारा गति मिल सकती है। यानी रेवेन्यू की भरपाई वॉल्यूम ग्रोथ के जरिए करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

अप्रैल 2025 में बना था रिकॉर्ड

GST कलेक्शन के लिहाज से अप्रैल 2025 अब तक का सबसे मजबूत महीना रहा है। उस दौरान सरकार ने ₹2.37 लाख करोड़ का GST जुटाया था, जो सालाना आधार पर 12.6% की बढ़ोतरी थी। इससे पहले अप्रैल 2024 में ₹2.10 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कलेक्शन दर्ज किया गया था। ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में औपचारिकरण और टैक्स अनुपालन लगातार मजबूत हो रहा है।

अर्थव्यवस्था की सेहत का संकेत

GST कलेक्शन को अक्सर अर्थव्यवस्था की सेहत का पैमाना माना जाता है। जब कलेक्शन बढ़ता है, तो इसका मतलब होता है कि उपभोक्ता मांग मजबूत है, उद्योगों में उत्पादन बढ़ रहा है और टैक्स नेटवर्क के भीतर लेनदेन का दायरा बढ़ा है। दिसंबर 2025 के आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि टैक्स कटौती के बावजूद आर्थिक गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं और सरकार को राजस्व के मोर्चे पर संतोषजनक प्रदर्शन मिल रहा है।

देश में GST व्यवस्था को 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था, जिसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के कई अप्रत्यक्ष करों को इसमें समाहित कर दिया गया। अब दिसंबर 2025 के आंकड़े दिखाते हैं कि यह प्रणाली धीरेधीरे सरकार के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद राजस्व स्रोत बन चुकी है, जिसे भारत सरकार अर्थव्यवस्था के प्रबंधन में एक अहम संकेतक के तौर पर देख रही है।

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Author: THE CG NEWS

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